थानेसर नगर परिषद ने ऑल इंडिया लेवल पर भले ही पिछले वर्ष के मुकाबले अपनी रैंकिंग को सुधारा है, लेकिन प्रदेश स्तर पर यह टॉप-10 में स्थान नहीं बना पाई। प्रदेश स्तर पर रैंकिंग पिछले वर्ष के मुकाबले खिसक कर दो अंक और पीछे चली गई है, जिससे प्रदेश स्तर पर इस सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाली 17 शहरों में हमारा शहर 16वें स्थान पर रहा।
वीरवार को केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की ओर से स्वच्छ सर्वेक्षण की रिपोर्ट जारी की गई। रिपोर्ट के अनुसार इस बार थानेसर नगर परिषद की रैंकिंग में 34 पायदान का सुधार हुआ है।
धर्मनगरी को 382 शहरों में ऑल इंडिया लेवल पर 219वीं रैंकिंग मिली है, जबकि पिछले साल यह रैंकिंग 252 थी। वहीं प्रदेश स्तर पर 2019 में रैंकिंग गिरकर 14वें नंबर पर आई थी। इस बार इस रैंकिंग में सुधार होने की बजाए यह दो अंक और नीचे खिसक कर 16वें स्थान पर चली गई है। इसके साथ ही नॉर्थ जोन में लाडवा ने 30वां स्थान व प्रदेश स्तर पर दूसरा स्थान प्राप्त किया है। वहीं, प्रदेश स्तर पर पिहोवा ने आठवां और शाहाबाद ने पांचवां स्थान प्राप्त किया।
छह हजार में से मिले 2322.24 अंक
वर्ष-2020 के लिए केंद्रीय शहरी निकाय मंत्रालय की ओर से कराए गए स्वच्छता सर्वेक्षण में घर-घर से कूड़ा उठाने, पब्लिक फीडबैक सहित अन्य प्वाइंट के अलग-अलग नंबर रखे थे। कुल छह हजार अंकों में से धर्मनगरी को 2322.24 अंक हासिल हुए हैं।
इस प्रकार प्राप्त हुए अंक
-सिटीजन फीडबैक- 1500 में से 1110 अंक
-डायरेक्टर ऑबसर्वेशन- 1500 में से 942.55
-सर्विस लेवल प्रोग्रेस- 1500 में से 00
-सर्टिफिकेशन- 1500 में से 269.69
-कुल अंक- 6000, प्राप्त हुए 2322.24
सर्विस लेवल प्रोग्रेस और सर्टिफिकेशन में पिछड़े
शहर की सफाई को लेकर सर्विस लेवल प्रोग्रेस यानी कूड़ा उठान और निस्तारण के कैसे प्रबंधन हैं। यहां अपना शहर पिछड़ गया। इसमें 1500 में से शून्य अंक ही मिले। हालांकि यहां घर-घर से कूड़ा उठाने की टिपर सेवा जारी है, लेकिन कूड़ा निस्तारण और नप के पास अपना डंपिंग जोन न होने का खामियाजा शहर को भुगतना पड़ा। इसके अलावा सर्टिफिकेशन के लिए निर्धारित 1500 अंक में से भी शहर को महज 269.69 अंक ही मिले।
2019 में 252 व 2018 में थी 199 रैंक
थानेसर नगर परिषद वर्ष 2019 में वर्ष 2018 के मुकाबले 53 अंक पिछड़ गया था। अप्रैल तक हुए सर्वेक्षण में 252 रैंक देश भर में प्राप्त किया था और प्रदेश में 14वां रैंक प्राप्त किया था। वर्ष 2018 में थानेसर 199 रैंक पर था। वहीं वर्ष 2017 में नप का रैंक 253 था। इस बार 2020 में यह रैंकिग 219 आई है।
प्रदेशस्तर में लाडवा दूसरे स्थान पर
नॉर्थ जोन पर लाडवा ने 191 नगर पालिकाओं में 30वीं रैंकिंग और प्रदेश स्तर पर 20 नपा में से दूसरी रैंकिंग प्राप्त की है। वहीं पिहोवा ने 191 नपा में से नॉर्थ जोन में 49वीं और प्रदेशस्तर पर 20 में से आठवीं रैंकिंग प्राप्त की। शाहाबाद ने नॉर्थ जोन में 191 में से 38वीं और प्रदेश में 20 में से पांचवी रैंकिग प्राप्त की।
प्रदेश स्तर पर पिछड़ने का कारण
शहर की सफाई में अव्वल आने का दावा कर रहे नप अधिकारियों की माने, तो बेहतर सेग्रीगेशन न होने के कारण शहर रैंकिंग में पिछड़ा है। यहां उठाने की तो व्यवस्था है, लेकिन निस्तारण की व्यवस्था न होने का खामियाजा भुगतना पड़ा।
शहर का हुआ देश में नाम : उमा सुधा
नगर परिषद चेयरपर्सन उमा सुधा ने कहा कि शहर में इस समय कई विकास कार्य चह रहे हैं। अगली बार रैंकिंग में और सुधार होगा। इस बार 219वीं रैंकिंग हासिल कर शहर का देश में नाम हुआ है।
लाडवा का रहा अव्वल प्रदर्शन
लाडवा नगरपालिका ने स्वच्छ सर्वेक्षण में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। लाडवा नपा प्रदेश भर में दूसरे स्थान पर रहा तो नार्थ जोन में 30वां स्थान हासिल किया। नपा के 16 वार्डों से 392 लोगों ने हिस्सा लिया। सर्वेक्षण रिपोर्ट में लाडवा नपा को 6 हजार में से 2656.06 अंक मिले, जो जिले भर में सबसे ज्यादा हैं।
पिहोवा में 1519 लोगों ने लिया सर्वेक्षण में हिस्सा
पिहोवा नगरपालिका का स्वच्छ सर्वेक्षण में शानदार प्रदर्शन रहा। यहां पर 1519 लोगों ने सर्वेक्षण में अपनी भागेदारी दर्ज कराई। नपा के 18 वार्डों में मूल्यांकन से लेकर सिटीजन फीडबैक, सर्विस लेवल प्रोग्रेस तथा सर्टिफिकेशन श्रेणी में पिहोवा का प्रदर्शन अव्वल रहा। पिहोवा नपा को सर्वेक्षण रिपोर्ट में 6 हजार में से 2494.14 अंक मिले, जिससे प्रदेश में 8वां और नार्थ जोन पर 49वां स्थान हासिल किया।
शाहाबाद में सबसे ज्यादा 4242 लोगों ने लिया हिस्सा
राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित शाहाबाद नगरपालिका में लोगों सबसे ज्यादा अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। यहां 4242 लोगों की फीडबैक से नपा को 6 हजार में से 2560.92 अंक मिले। जिससे शाहाबाद को नार्थ जोन में 38वां और प्रदेश में 5वां स्थान मिला। अहम पहलू यह भी है कि सर्टिफिकेशन में यूएलबी स्कोर शाहाबाद नपा का सबसे ज्यादा रहा।