कुरुक्षेत्र। कोर्ट मई 2011 के बहुचर्चित स्वीटी हत्याकांड में तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत इस मामले में 21 मई को अपना फैसला सुनाएगी।
चार मई साल 2011 को सिंचाई विभाग के जेई रणधीर सिंह की बेटी स्वीटी को कुछ युवकों ने जबरदस्ती गाड़ी में डाल लिया और अगले दिन पांच मई को उसकी लाश जिला करनाल के गांव संघोई के निकट नहर किनारे मिली थी। इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन युवकों को काबू किया।
इनमें करनाल के नगला निवासी रणजोध, गुरविंद्र सिंह और वीरेंद्र सिंह शामिल थे। अदालत में विचाराधीन इस मामले की सुनवाई करते हुए एडिशनल सेशन जज पूनम सुनेजा ने तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया है। बताया गया है कि अदालत इस मामले में अपना फैसला 21 मई को सुनाएगी।
मई 2011 में हुई इस जघन्य अपराध में आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर नगर के विभिन्न संगठन सड़कों पर उतरे थे। धरना-प्रदर्शन करते हुए संगठनों के प्रतिनिधियों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ काफी रोष व्यक्त किया था।
इस हत्याकांड में शामिल आरोपियों के खिलाफ आमजन भी काफी आक्रोश था। छात्रा के परिजनों और संगठनों के साथ मिलकर आमजन भी धरने-प्रदर्शन में शामिल हुआ था।
आरोपियों की गिरफ्तारी न होने तक रोष प्रदर्शनों का सिलसिला जारी रहा और जब इस मामले में गिरफ्तारी हो गई तो फिर कहीं जाकर लोगों का कुछ हद तक रोष शांत हुआ।
इस मामले में पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारी पर भी लोगों में संशय बना रहा। उस दौरान असली आरोपियों की गिरफ्तार नहीं करने की चर्चाएं खूब हुईं। हालांकि बाद में यह चर्चाएं थम गईं।
स्वीटी हत्याकांड के प्रमुख बिंदु
4 मई को सिंचाई विभाग के जेई रणधीर सिंह ने अपनी बेटी को स्कूटी लेकर पिपली रोड पर बुलाया
रात आठ बजकर 45 मिनट पर स्वीटी अपने पिता को लेने के लिए स्कूटी लेकर घर से निकली
स्कॉर्पियो सवार युवकों ने जिंदल चौक के पास स्कूटी को टक्कर मारी और उसे गाड़ी में डाल लिया
रणधीर सिंह उस स्थान पर पैदल पहुंचे और स्वीटी की स्कूटी को पहचाना, वह पुलिस के पास गए
पुलिस ने उनकी शिकायत को तवज्जो नहीं दी और पांच मई को स्वीटी की लाश करनाल से मिली
पांच मई को 12 बजे से शाम छह बजे तक स्थानीय लोगों और परिजनों ने जीटी रोड जाम रखा
सात मई को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन ने पुलिस वालों को फटकार लगाई
आठ मई को कुरुक्षेत्र में सेक्टर-3 के लोगों और स्थानीय संगठनों ने कैंडल मार्च निकाला