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Kurukshetra News: सुनीता ने कैंटीन से बदली अपनी तकदीर, तीन महिलाओं को भी बनाया आत्मनिर्भर

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कुरुक्षेत्र। कैंटिन संचालक बुरिया देवी खाना बनाती हुई। संवाद
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कुरुक्षेत्र। महिला होने के कारण कारोबार नहीं कर सकती, इस सोच को सुनीता ने गलत साबित किया है। उन्होंने पांच साल पहले जिला लघु सचिवालय के बाहर एक छोटी रोटी कैंटीन शुरू की थी। आज वह न केवल अपने परिवार का सहारा हैं, बल्कि कई महिलाओं के लिए प्रेरणा भी बनी हैं।
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सुनीता ने शुरुआत में अकेले काम किया, लेकिन पति और परिवार के सहयोग से उनका हौसला बढ़ा। उनके हाथ के खाने की मांग धीरे-धीरे बढ़ने लगी। उन्होंने अपने गांव अमीन की तीन-चार महिलाओं को भी इस काम से जोड़ा। उनकी कैंटीन में रोजाना सैकड़ों लोग भोजन करते हैं। लघु सचिवालय के कर्मचारी और साई छात्रावास के खिलाड़ी भी यहां से खाना पैक करवाते हैं। सुनीता ने जिन चार से पांच महिलाओं को काम सिखाया, उनमें से दो अब अपनी कैंटीन चला रही हैं। वे अपने परिवार का खर्च खुद उठा रही हैं। सुनीता वर्तमान में भी दो अन्य महिलाओं को कैंटीन चलाने का प्रशिक्षण दे रही हैं। यह उनके लिए सबसे बड़ी खुशी की बात है।
आत्मनिर्भरता की राह
सुनीता की कैंटीन सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक चलती है। वह प्रतिदिन दो हजार रुपये कमा लेती हैं। इससे उन्हें और उनके साथ काम करने वाली महिलाओं को हर रोज 700 रुपये बच जाते हैं। यह उनकी मेहनत और लगन का परिणाम है। उन्होंने कई महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है।
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अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा

एक अन्य कैंटीन संचालक बुरिया देवी भी करीब तीन साल से यहां कैंटीन चला रही हैं। वह उन महिलाओं में शामिल हैं जो अपने बलबूते आगे बढ़ रही हैं। बुरिया देवी का कहना है कि परिवार का सहयोग और आत्मविश्वास हो तो कोई काम मुश्किल नहीं। आज शहर में चार से पांच ऐसी कैंटीन हैं, जहां महिलाएं प्रमुख भूमिका में हैं। ये महिलाएं समाज में एक नई मिसाल पेश कर रही हैं।

कुरुक्षेत्र। कैंटिन संचालक बुरिया देवी खाना बनाती हुई। संवाद

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