कुरुक्षेत्र। धूम्रपान करने पर परिजनों की डांट से खफा 13 वर्षीय छात्र ने खुद को कमरे में बंद कर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बच्चे की पहचान रतगल वासी सुमित पुत्र अनिल कुमार के रूप में हुई है। घटना की जानकारी सोमवार सुबह साढ़े सात बजे उस समय हुई, जब परिजनों ने बगल के कमरे की दीवार से झांक कर देखा। उन्होंने पाया कि सुमित का शव रोशनदान की ग्रिल के सहारे लटका हुआ है। सुमित के बड़े भाई सचिन को दूसरे कमरे के दिवार के ऊपर से दूसरे कमरे में प्रवेश कराया गया, जिसने अंदर के कमरे का दरवाजा खोला। तब परिजनों ने सुमित के शव को फंदे से उतारा व पुलिस को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंच शव कब्जे में ले लिया, जिसे पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों को सौंप दिया गया।
बताया गया है कि 13 वर्षीय सुमित राजकीय माध्यमिक विद्यालय रतगल में सातवीं कक्षा का छात्र था व उसके पिता अनिल कुमार मेहनत-मजदूरी व माता अनीता गृहिणी है। रविवार को सुमित के पिता काम पर गए हुए थे व माता सत्संग में गई हुई थी। छुट्टी होने के चलते सुमित अपने दोस्तों के साथ बिना किसी को कुछ बताए ब्रह्मसरोवर पर घूमने के लिए चला गया। जब सुमित की मां शाम करीब छह बजे घर वापस लौटी और उसे पता चला कि सुमित बिना किसी को बताए ब्रह्मसरोवर गया है, तो वापस आने पर उसे फटकार लगाई। इसके बाद सुमित गुस्से में घर से बाहर चला गया। करीब साढे़ सात बजे तक सुमित के घर पर न लौटने पर उसकी मां को चिंता हुई तो वो उसे घर के आसपास तलाशने लगी। तभी उसने घर के पीछे जाकर देखा तो सुमित वहां धूम्रपान कर रहा था, जिस पर सुमित को खूब डांटा व उसे घर ले जाकर एक कमरे में बंद कर दिया और बाहर से कुंडी लगा दी। इस दौरान डांट से खफा सुमित ने भी कमरे के अंदर से कुंडी लगा ली। कुछ देर बाद जब सुमित की मां ने दरवाजा खोलना चाहा तो सुमित ने दरवाजा नहीं खोला। सुमित के बड़े भाई सचिन ने भी उसे कई आवाजें लगाए लगाई, लेकिन सुमित अंदर से दरवाजा न खोलने की बात कहता रहा। परिजनों का दरवाजा खुलवाने का प्रयास रात्रि करीब 10 बजे तक जारी रहा, लेकिन सुमित अंदर से उनके साथ बात तो करता रहा, लेकिन दरवाजा नहीं खोला। तब सुमित के पिता घर आए तो उन्होंने करीब 11 बजे कमरे का दरवाजा खटखटाया, तो अंदर से कोई आवाज नहीं आई। उन्होंने कमरे में झांक कर देखने का भी प्रयास किया लेकिन कमरे में अंधेरा होने के कारण कुछ दिखाई नहीं दिया। फिर उन्होंने सोचा कि वह सो गया होगा। जब सुबह साथ लगते कमरे की छोटी दीवार से कमरे में झांका गया तो सुमित का शव रोशनदान की ग्रिल के सहारे लटका पाया। मामले की सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस पहुंच गई व फोरेंसिक टीम को मौके पर बुलाकर तथ्य जुटाए गए। पुलिस ने सुमित के शव का पोस्टमार्टम करा परिजनों को सौंप दिया।
पिता की लोवर का बनाया था फंदा
परिजनों की डांट से खफा सुमित रात्रि 12 बजे तक तो परिजनों से बातचीत करता रहा, लेकिन जब 12 बजे के बाद कमरे से कोई आवाज नहीं आई तो परिजनों ने सोचा कि वह सो गया है। लेकिन सुमित ने बंद कमरे में पड़ी अपने पिता अनिल की लोवर को फंदा बनाकर पहले उसे कमरे में बनी स्लेव पर चढ़कर रोशनदान में फंसाया फिर उसे गले में बांधकर लटक गया।
दूसरे कमरे की दीवार से अंदर प्रवेश कर खोला कमरा
जिस कमरे में सुमित ने फांसी लगाई, वह कमरा ज्यादातर बंद ही रहता था। उसके साथ में लगते दूसरे कमरे की दीवार के ऊपर से कमरे में प्रवेश करने का रास्ता था। इस दीवार पर एक लोहे का गेट रखा हुआ था, जिसके ऊपर से सुमित ने बड़े भाई सचिन ने कमरे में प्रवेश किया और अंदर से कमरे का दरवाजा खोला।
पढ़ाई-लिखाई में सामान्य था सुमित
सुमित की स्कूल इंजार्च ने बताया कि सुमित पढ़ाई-लिखाई में सामान्य था। वह हर रोज स्कूल आता था व सबसे अच्छे से बरताव किया करता था। जब उन्हें सुबह स्कूल आते ही सुमित द्वारा आत्महत्या करने की सूचना मिली तो वे तुरंत उसके घर पर गए।
एक साल से रतगल में किराये के मकान में रह रहे थे परिजन
सुमित के परिजन करीब एक साल से रतगल में किराये के मकान में रह रहे थे। जानकारी अनुसार वे मुख्य रूप से बीबीपुर इंद्री जिला करनाल के रहने वाले हैं। सुमित का 15 वर्षीय बड़ा भाई सचिन राजकीय स्कूल देवीदासपुरा में नौंवी कक्षा का छात्र है। दोनों भाईयों का आपस में गहरा लगाव था व दोनों हमेशा एक साथ ही खेलते-कूदते थे।
गलत संगत में रहने पर परिजनों ने था डांटा : शिव कुमार
मामले में जांच अधिकारी शिव कुमार ने कहा कि सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंच कार्रवाई शुरु कर दी थी। वहीं सुमित के पिता के बयान भी दर्ज कर लिए गए है। बयान में बताया कि सुमित गलत संगत में पड़ गया था, जिस कारण उसे डांटा था। डांट से नाराज होकर सुमित ने खुद को कमरे में बंद कर लिया जब सुबह देखा तो उसका शव रोशनदान की ग्रिल से लटका हुआ पाया।
अभिभावक रखें बच्चों की गतिविधियों पर नजर: डॉ. मड़ाण
एलएनजेपी अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेंद्र मड़ाण ने कहा कि माता-पिता बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें। उनकी समस्याएं सुने और उन्हें सुलझाने की कोशिश करें। डॉ. सुरेंद्र ने कहा कि पहले 10 से 15 साल तक के बच्चों को मौत के मतलब व इसके स्वरूप की कोई जानकारी नहीं होती थी, लेकिन अब उन्हें लगता है कि अपमान व जिल्लत से बचने का यही सबसे बेहतर तरीका है। टीवी और इंटरनेट ने बच्चों को और जिद्दी, भावुक व संवेदनशील बना दिया है। अपने मन के मुताबिक काम नहीं होने पर वे मौत की राह चुन लेते हैं।
suicide- फोटो : Kurukshetra