कुरुक्षेत्र। प्रदेश में 21 जुलाई से शुरू हुए टीबी मुक्त भारत अभियान ने सफलता के नए आयाम कर दिए हैं। इसके तहत केंद्र सरकार द्वारा विशेष रूप से कुरुक्षेत्र जिले को चुना गया। यह सब स्वास्थ्यकर्मियों की लगन से संभव हुआ। इसमें एक विशेष अभियान अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) के नेतृत्व में चलाया गया। इस अभियान में राज्य के सभी जिलों से आए टीबीएचवी कर्मचारियों ने अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई और जिले के हर गांव और स्लम क्षेत्र में घर-घर जाकर टीबी की स्क्रीनिंग की।
अभियान से जुड़े पूर्व सिविल सर्जन एवं लोकनायक जयप्रकाश जिला नागरिक अस्पताल के हृदय एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ.शैलेंद्र ममगाईं शैली का कहना है कि अभियान के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों ने टीबी के लक्षणों से युक्त लोगों की पहचान की और उनकी जांच के लिए सीवाई-टीबी टेस्ट, छाती के एक्स-रे और बलगम की जांच की। जिन व्यक्तियों की रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई,उन्हें तत्काल टीबी की दवाइयां दी गईं। इसके अलावा,छाती रोग विशेषज्ञों के परामर्श पर टीबी लक्षण युक्त लोगों को टीपीटी(टीबी रोकथाम उपचार)भी दी गई ताकि वे टीबी की चपेट में न आएं।
उन्होंने बताया कि इस अभियान की सफलता में महिला स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका विशेष रूप से सराहनीय रही। लगभग 35 महिला टीबीएचवी कर्मचारियों ने अपने छोटे बच्चों, घर-परिवार और बुजुर्गों को पीछे छोड़कर राष्ट्र सेवा को प्राथमिकता देते हुए सेना के जवानों की तरह समर्पण और लगन के साथ अपना कर्तव्य निभाया,जिसके चलते कुरुक्षेत्र जिले को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में एक बड़ी सफलता मिली है।
डॉ. शैली के मुताबिक इस अभियान में भिवानी से आई टीबीएचवी अमिता जैसी कई कर्मचारियों ने भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित की,जिन्होंने कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझने के बावजूद अपने कर्तव्य को पूरी निष्ठा के साथ निभाया।