यूनाइटेेड फोर्म ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर शुक्रवार को जिलेभर में सार्वजनिक बैंकों की हड़ताल रही, जिससे लगभग 300 करोड़ का लेनदेन प्रभावित हुआ। बैंक बंद रहने से जहां उपभोक्ताओं को भारी परेशानी झेलनी पड़ी वहीं बैंक कर्मियों ने केंद्र सरकार की बैंकों को लेकर अपनाई जा रही नीति को लेकर गहरा रोष भी व्यक्त किया। यूनाइटेड फोर्म ऑफ बैंक यूनियन की पहले से ही घोषित हड़ताल के चलते जिलेभर में हड़ताल का पूर्ण असर रहा, जिसमें भारतीय स्टेट बैंक व उसके सहयोगी बैंकों सहित अन्य बैंकों के कर्मचारियों और अधिकारियों की 9 यूनियन शामिल रही।
हड़ताल के चलते बैंकों में कामकाज पूरी तरह से ठप रहा, जिसके चलते बैंकों में लेनदेन को लेकर आए उपभोक्ताओं को निराश होकर लौटना पड़ा। भारतीय स्टेट बैंक ऑफ स्टाफ एसोसिएशन के क्षेत्रीय सचिव गुरदीप सिंह व जिला प्रधान विनय कुमार ने आरोप लगाया कि एक ओर तो केंद्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के छोटे-बड़े बैंकों का विलय करके बड़े-बड़ें बैंक बनाना चाहती है जबकि छोटे-छोटे निजी बैंकों को लाइसेंस दे रही है। आउटसोर्सिंग के नाम पर सार्वजनिक बैंकों का कामकाज बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। कर्मचारी संघ के पूर्व सहायक महासचिव हवा सिंह रंगा ने सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों पर गहरा रोष व्यक्त किया और कर्मचारियों को आह्वान किया कि वे सरकार की बैंक कर्मचारी विरोधी नीतियों को डटकर मुकाबला करें। भारतीय स्टेट बैंक अधिकारी संघ के पूर्व क्षेत्रीय सचिव गुलशन कुमार ग्रोवर ने कहा कि केंद्र सरकार ऐसी नीतियां बना रही हैं, जिससे सरकारी बैंक बंद होने के कगार पर पहुंच रहे हैं, लेकिन सरकार को इसके दुष्परिणाम भुगतने होंगे। स्टेट बैंक ऑफ पटियाला के कर्मचारी नेता जसपाल सिंह ने भी सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की।
कामकाज रहा ठप
पंजाब नेशनल बैंक के मंडल कार्यालय में चीफ मैनेजर एसके जैन व सहायक जनरल मैनेजर अभय परमार ने बताया कि हड़ताल के चलते पंजाब नेशनल बैंक में शुक्रवार को कोई कामकाज नहीं हुआ, जिसके चलते बैंक के कारोबार पर बड़े स्तर पर असर हुआ है।
ये रही मुख्य मांगें
बैंक कर्मचारी और अधिकारी संघों के नेताओं ने कहा कि हालांकि हड़ताल सार्वजनिक क्षेत्र बचाओ के मुख्य मुद्दे पर की गई, लेकिन बैंक कर्मियों की अन्य मांगों में नए कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन नीति लागू करना, ठेका प्रथा को समाप्त करना, दसवें वेतन समझौते की बाकी विसंगतियों को दूर करना, पेंशन व पारिवारिक पेंशन का संशोधन, बैंकों के निदेशक बोर्ड में प्रतिनिधि निदेशकों की नियुक्ति करना व एनपीए वसूली कानूनों में बदलाव करना शामिल है।