धर्मनगरी स्थित श्रीदेवीकूप मां भद्रकाली मंदिर प्रदेश ही नहीं देश भर के लोगों की आस्था का बड़ा केंद्र बना चुका है। मनोकामना पूरी होने पर यहां घोड़े चढ़ाए जाने की वर्षों पुरानी परंपरा है, जिसे देश के अनेकों केंद्रीय मंत्रियों व प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों से लेकर राष्ट्रपति तक निभा चुके हैं। नवरात्र उत्सव के दौरान शक्तिपीठ के प्रति लोगों की श्रद्धा और भी बढ़ जाती है। हर नवरात्र पर यहां हजारों श्रद्धालु मां के दर्शन व पूजा अर्चना के लिए पहुंचते हैं। यह देश के 52 शक्तिपीठों में से प्रदेश का एकमात्र शक्तिपीठ है।
नवरात्र उत्सव यहां बेहद खास अंदाज में मनाया जाता है। यहां तक कि मंदिर को 11 देशों के फूलों से सजाया जाता है, जिसके लिए मुंबई तक के कारीगर पहुंचते हैं। भद्रकाली के देश के पांच मंदिरों में से एक श्री देवीकूप मां भद्रकाली मंदिर को सावित्री पीठ, देवी पीठ, कालिका पीठ व आदी पीठ भी कहा जाता है। मां भद्रकाली शक्तिपीठ का इतिहास माता सती से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि जब भगवान शिव सती के मृत देह को लेकर ब्राह्मांड में घूमने लगे तो भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र के जरिए सती के शरीर को कई हिस्सों में बांट दिया। जहां-जहां देवी सती के अंग गिरे वहां पर शक्तिपीठ की स्थापना की गई। मां भद्रकाली देवीकूप में सती माता का दायां टखना गिरा था।
... जब भगवान श्रीकृष्ण ने दान किए घोड़े
पौराणिक कथाओं के मुताबिक महाभारत की लड़ाई के लिए आगे बढ़ने से पहले भगवान कृष्ण के साथ पांडवों ने यहां युद्ध विजय कामना के लिए मां भद्रकाली की पूजा अर्चना की थी और युद्ध की समाप्ति पर श्री कृष्ण ने अपने रथ के घोड़े यहां दान किए थे। इसके बाद यहां सोना, चांदी व मिट्टी से बने घोड़े चढ़ाने की परंपरा शुरू हो गई और आज तक यहां अपनी मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु घोड़े चढ़ाते रहे हैं। यह भी माना जाता है कि यहीं पर ही श्रीकृष्ण और बलराम का मुंडन संस्कार भी कराया गया था।
शक्तिपीठ की शोभायात्रा होती है विशेष
नवरात्र उत्सव का शुभारंभ शक्तिपीठ की ओर से निकाली जाने वाली शोभायात्रा से होता है, जो बेहद भव्य एवं खास होती है। इस शोभायात्रा में 5100 कलशधारी महिलाएं शामिल होती है तो सभी 52 शक्तिपीठों के ध्वज भी होते हैं। नवरात्र उत्सव के दौरान यहां शनिवार व रविवार काे श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ती है।
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ये राष्ट्रपति चढ़ा चुके है घोड़े
पीठाध्यक्ष सतपाल शर्मा का कहना है कि आठ फरवरी 2012 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल, नौ अप्रैल 2013 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने, 11 अगस्त 2023 को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद यहां पूजा अर्चना कर चांदी के घोड़े भी चढ़ा चुके हैं। यहीं नहीं तत्कालीन केंद्रीय पर्यटन मंत्री उमा भारती के अलावा प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, ओमप्रकाश चौटाला सहित विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री व राज्यपाल तक पूजा अर्चना कर चुके हैं।
प्रख्यात गायक बहा चुके भक्ति रस
मंदिर में प्रख्यात गायक अनुराधा पौडवाल, नरेंद्र चंचल, रिचा शर्मा, नेहा कक्कड़, सरदूल सिकंदर, कंठ कलेर, सरदूल सिकंदर, मास्टर सलीम, नछतर गिल, रेखा ढल्ल व कुमार विशु भी यहां नवरात्र उत्सव के दौरान अपने भजनों के जरिए भक्ति रस बहा चुके हैं।