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श्री लक्षचंडी महायज्ञ: ब्राह्मणों-आचार्यों के मंत्रोच्चार से गूंजी नगरी, कवियों की वाणी से बही भक्ति रस धारा

Mon, 13 Feb 2023 02:12 AM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, शाहाबाद, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)

सार

श्री लक्षचंडी महायज्ञ में सुबह से शाम तक ब्राह्मणों-आचार्यों के मंत्रोच्चार से यज्ञनगरी गूंजी तो वहीं शाम को सांस्कृतिक संध्या में कवियों की वाणी से भक्ति रस की धारा बही। श्री लक्षचंडी महायज्ञ के लिए मुख्य कुंड के अतिरिक्त 109 हवन कुंड बनाए गए हैं। 1743 ब्राह्मणों और 16 आचार्यों ने दुर्गा सप्तशती के 700 श्लोकों का पाठ किया। वहीं कुमार विश्वास ने भी समा बांधा।

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श्री लक्षचंडी महायज्ञ महाआरती करते ब्राह्मण। दूसरी और कुमार विश्वास मंच पर पहुंचे। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हरियाणा के कुरुक्षेत्र के शाहाबाद क्षेत्र गांव गुमटी में श्री लक्षचंडी महायज्ञ से रविवार को दूसरे दिन भी पूरा क्षेत्र अध्यात्म व भक्तिरस में डूबा रहा। सुबह से शाम तक 1743 ब्राह्मणों और 16 आचार्यों ने दुर्गा सप्तशती के 13 अध्याय और 700 श्लोकों का पाठ किया। महायज्ञ में दशमांश यानी दुर्गासप्तशती के 73 लाख मंत्रों से यज्ञ में आहुतियां दी गईं। इस दौरान पूरा क्षेत्र मंत्रोच्चार से गूंज उठा। 

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60 एकड़ क्षेत्र में बनाई गई यज्ञ नगरी में प्रधान कुंड के अलावा 109 कुंड बनाए गए हैं, जिनमें लगातार आहुतियां डाली जा रही हैं। इसमें भाग लेने के लिए दूर-दराज से संत और श्रद्धालु पहुंच रहे है। सुबह दो घंटे तक अरणि मंथन पाठ के बाद महायज्ञ में ब्राह्मणों और आचार्यों ने श्लोकों का पाठ किया।
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श्री लक्षचंडी महायज्ञ में आहुति डालती गुमटी वाली माता जी व ब्राह्मण।

वहीं शाम के समय शारदा पीठ के शंकराचार्य श्री जगद्गुरु शंकराचार्य प्रथा विशाखा, श्री शारदा पीठ श्री श्री श्री स्वरूपानन्देन्द्र सरस्वती महास्वामी, श्री गुमटी वाली माता की अध्यक्षता व उत्तर अधिपति श्री स्वात्मानन्देन्द्र सरस्वती स्वामी के सानिध्य में महाआरती हुई, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। दूसरी ओर लंगर भवन में श्रद्धालुओं के लिए सुबह, दोपहर और रात को भंडारे की व्यवस्था की गई। 

‘राम सृष्टा भी हैं और सृष्टि भी’ की प्रस्तुति से कुमार विश्वास ने बांधा समा

श्री लक्षचंडी महायज्ञ के दूसरे दिन रविवार को सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही, जिसमें श्रद्धालु भक्ति रस से सराबोर हुए। विशेष पंडाल में भजन संध्या के दौरान प्रख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास ने प्रस्तुतियों से भगवान राम, माता सीता और मां भगवती का गुणगान किया। 
उन्होंने जब अपना प्रसिद्ध भजन...राम सृष्टा भी हैं और सृष्टि भी, राम दृष्टा भी हैं और दृष्टि भी...की प्रस्तुति दी तो श्रद्धालु झूम उठे। उन्होंने जिंदगी जीने की सीख देते हुए कहा कि जन्म महत्वपूर्ण नहीं है, मृत्यु महत्वपूर्ण है। दशमेश पिता के पुत्रों ने छोटी उम्र में शहादत दी, लेकिन आज भी लोग उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लेते हैं। उन्होंने कहा कि किसी दिन मुकद्दर जंगल में छोड़ देगा तो अंग्रेजी कहानियां नहीं, हमारा राम-श्याम और पुरुषार्थ ही काम आएगा। 

ऋचा शर्मा की प्रस्तुति ‘तेरी राहवां विच पलकां बिछावां तू घर मेरे आजा दातिए’ पर झूमे श्रोता

श्री लक्षचंडी महायज्ञ के दूसरे दिन रविवार को सांस्कृतिक संध्या में भजन गायिका ऋचा शर्मा ने भक्तिमय प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। गुमटी वाली माता जी की उपस्थिति में ऋचा शर्मा ने जब तेरी राहवां विच पलकां बिछावां तू घर मेरे आजा दातिए.. भजन पेश किया तो पंडाल में बैठे लोग झूम उठे।

इसके बाद उन्होंने पल्ला-पल्ला भर दे पल्ला, सुन ले आज पुकारां, तैनू वाजां मारा, देवी मईया के भवन गुटवन खेले लांगूरिया की प्रस्तुति दी। इसके बाद उन्होंने अपना सबसे चर्चित भजन... रात श्याम सपने में आए ...पेश किया तो पंडाल में मौजूदा हजारों श्रद्धालु मंत्रमुग्ध नजर आए। 

 

महाभारत के युधिष्ठिर, अपारशक्ति खुराना और लखबीर लक्खा की प्रस्तुति कल

गुमटी वाली माता मंदिर के मुख्य सेवादार कमल चुघ ने बताया कि 14 फरवरी को आयोजित की जाने वाली भजन संध्या में प्रसिद्ध भजन गायक लखबीर सिंह लक्खा, मणि लाडला, अपारशक्ति खुराना, महाभारत में युधिष्ठिर की भूमिका निभाने वाले गजेंद्र चौहान सांस्कृतिक संध्या में प्रस्तुति देंगे।

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72 वर्षों से मंदिर में यज्ञ की परंपरा पर पहली बार श्री लक्षचंडी महायज्ञ

गांव गुमटी मंदिर में यज्ञ की परपंरा 72 वर्षों से चली आ रही है, लेकिन पहली बार श्री लक्षचंडी महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 17 राज्यों से पहुंचे ब्राह्मण मंत्रोच्चार कर रहे हैं। वहीं विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु भी पहुंचे हैं, जिसके यज्ञ नगरी में भारतीय संस्कृति की अद्भुत छटा दिख रही है। 

श्री गुमटी वाली माता जी के मुताबिक, यजुर्वेद प्रथम अध्याय अनुसार यज्ञ ही सर्वोतम कर्म है। इसे ध्यान में रखते हुए ही श्री गुमटी मंदिर में 72 वर्षों से यज्ञों का आयोजन हो रहा है। वहीं पहली बार हो रहे श्री लक्षचंडी महायज्ञ में दक्षिणी भारत के केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश व कर्नाटक से 400 ब्राह्मण व उत्तर भारत के हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, उत्तरप्रदेश व चण्डीगढ़ से तथा पश्चिमी भारत के गुजरात, राजस्थान व महाराष्ट्र के अलावा पूर्वी भारत के पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, बिहार तथा झारखंड से 1700 ब्राह्मण पहुंचे हैं। विदित हो कि श्री लक्षचंडी महायज्ञ के चलते गुमटी वाली माता जी मंदिर अचानक चर्चा में आ गया है, जबकि श्रीश्री 1008 माता प्रकाश देवी द्वारा वर्ष 1950 में इसकी स्थापना की गई थी। 

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