शाहाबाद। किसानों के दिल्ली कूच को लेकर पांचवें दिन भी नेशनल हाईवे 44 मारकंडा नदी के पास पूरी तरह से सील रखा गया। छह स्तरीय बैरिकेडिंग के साथ हाईवे बंद करने के साथ-साथ सेना व पुलिस के जवानों का भी कड़ा पहरा रहा। वहीं हाईवे बंद होने से राहगीरों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
भले ही अभी किसान अंबाला के पंजाब से लगते शंभू बार्डर पर डटे हुए हैं और आज तक शाहाबाद में नेशनल हाईवे पर किसानों की ओर से कोई हलचल भी नहीं हुई है। इसके बावजूद हाईवे सील किए जाने का खामियाजा आम राहगीरों को भुगतना पड़ रहा है। वीरवार को भी राहगीर डायवर्ट किए रूटों से ही गुजरने को मजबूर हुए, जिसके चलते उन्हें अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है। इससे न केवल समय की बर्बादी हुई बल्कि डीजल व पेट्रोल आदि के तौर पर आर्थिक रूप से भी नुकसान हुआ। उधर क्षेत्र में कई निजी स्कूलों में छुट्टी रही।
गांवों के रास्तों को नाप रहे राहगीर, करते रहे जाम का सामना
नेशनल हाईवे को यहां मारकंडा नदी पर सील किए जाने के बाद राहगीरों के लिए महज एक ही रूट आगे निकलने के लिए रहता है। पंचकूला हाईवे शाहाबाद से 30 किलोमीटर दूर है, लेकिन यह दूरी भी राहगीरों को नापनी पड़ रही है। वीरवार को भी नेशनल हाईवे पर जो वाहन पिपली से विभिन्न गांवों के रास्तों से निकल कर आते रहे, उनके चलते जाम के हालात भी बने रहे। वाहनों को यहां शाहाबाद में लिंक रोड पर उतारकर बराड़ा रोड की तरफ भेजा जाता रहा। इस बार हाईवे सील किए जाने पर एंबुलेंस, फायरब्रिगेड जैसे वाहनों को निकालने के लिए भी कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है।