कुरुक्षेत्र। पवित्र ग्रंथ श्रीमदभगवद्गी ता जिसमें भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को युद्धक्षेत्र में जीवन, कर्तव्य और धर्म का उपदेश दिया, अब वह आधुनिक शिक्षा का हिस्सा बनेगा। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में नए शैक्षणिक सत्र 2025-26 से विद्यार्थी बीए में भगवद् गीता विषय का चयन कर सकेंगे। विश्वविद्यालय की ओर से आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति को जोड़ने का ये एक अनूठा प्रयास किया गया है। ये राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत यह कदम आधुनिकता के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
डीन एकेडमिक एफेयर्स प्रो. दिनेश कुमार ने बताया कि इस सत्र से छात्र श्रीमदभगवद् गीता विषय का चयन कर सकेंगे, जो उन्हें नैतिकता, जीवन प्रबंधन और आध्यात्मिक ज्ञान से जोड़ेगा। भगवद् गीता एक जीवन दर्शन का पाठ है, जो भारतीय संस्कृति और दर्शन का आधार है, जो अब बीए के छात्रों के लिए एक औपचारिक विषय होगा। इसमें विद्यार्थियों को तनाव प्रबंधन, नेतृत्व कौशल और आत्म-जागरूकता जैसे व्यावहारिक पहलुओं से परिचित करवाया जाएगा, जो आज के प्रतिस्पर्धी युग में अत्यंत जरूरी है। इसी के साथ स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं पर्यावरण में पीजी डिप्लोमा और बीएससी भौतिक विज्ञान में भूभौतिकी को नए विषय के रूप में शामिल किया गया है।
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स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं पर्यावरण पीजी डिप्लोमा में हैं 40 सीटें
डीन एकेडमिक एफेयर्स प्रो. दिनेश कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं पर्यावरण में पीजी डिप्लोमा में 40 सीटें उपलब्ध है। यह डिप्लोमा पर्यावरण संरक्षण, कार्यस्थल सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े आधुनिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेगा और वैश्विक चुनौतियों जैसे जलवायु परिवर्तन और सतत विकास के लिए युवाओं को तैयार करेगा। यह पर्यावरण और सुरक्षा के क्षेत्र में कॅरिअर बनाने वाले छात्रों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा। विज्ञान क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए बीएससी भौतिक विज्ञान के पाठ्यक्रम में भूभौतिकी को नए विषय के रूप में शामिल किया गया है। यह छात्रों को पृथ्वी की संरचना, भूकंप, खनिज संसाधनों और भूगर्भीय प्रक्रियाओं के अध्ययन में विशेषज्ञता प्रदान करेगा।
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एनईपी 2020 संस्कृति और आधुनिकता का संगम : प्रो. सचदेवा
कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा का कहना है कि एनईपी 2020 संस्कृति और आधुनिकता का संगम है। विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ भारतीय मूल्यों से जोड़ने की दिशा में अग्रणी बन रहा है। विवि और संबंधित महाविद्यालयों में देश में सबसे पहले पूरे प्रावधान के साथ एनईपी को लागू किया गया है। गीता विषय छात्रों को नैतिक दुविधाओं का सामना करने और जीवन में संतुलन बनाए रखने की कला सिखाएगा।