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श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का हरण नहीं, धर्मसम्मत वरण किया था : रमेश पाराशर

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कुरुक्षेत्र। सेक्टर-3 स्थित शिव मंदिर परिसर में आयोजित श्री विष्णु महायज्ञ के चौथे दिन श्रद्धालुओं ने श्री विष्णु पुराण कथा का श्रवण किया। कथा वाचक रमेश पाराशर ने श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का हरण नहीं, बल्कि धर्मसम्मत वरण किया था। उन्होंने कहा कि श्री विष्णु महापुराण को सभी पुराणों का बीज माना जाता है। इस ग्रंथ में गृहस्थाश्रम, सामाजिक व्यवस्था और जीवन के विभिन्न नियमों का विस्तृत वर्णन मिलता है। यही कारण है कि इसका विशेष महत्व है।
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कथा के दौरान रमेश पाराशर ने बताया कि रुक्मिणी ने स्वयं भगवान श्रीकृष्ण को पत्र भेजकर अपनी रक्षा और विवाह का निवेदन किया था। उन्होंने कहा कि रुक्मिणी ने पत्र में श्रीकृष्ण को धर्म और मर्यादा की चुनौती भी दी थी, ऐसे में भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म की रक्षा करते हुए उनका वरण किया था। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का विवाह उपासना का प्रतीक है, वासना का नहीं। इसी सकारात्मक भावना के आधार पर सृष्टि के सृजन और पालन की सनातन व्यवस्था संचालित होती है। कथा में भगवान श्रीकृष्ण की 16,108 पत्नियों और उनसे जुड़े आध्यात्मिक पक्ष का भी वर्णन किया गया। उन्होंने बताया कि इनका उल्लेख वेदों, उपनिषदों और प्रकृति के विभिन्न स्वरूपों के प्रतीक रूप में किया गया है। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भगवान विष्णु एवं श्रीकृष्ण के जयकारों से मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल में डूबा रहा।
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