कुरुक्षेत्र। ब्रह्मसरोवर तट पर शनि अमावस्या पर भंडारें में पैसे वितरीत करती स्वामी मुक्तानंद। व
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कुरुक्षेत्र। ज्योतिसर स्थित श्री गीता कुंज आश्रम बद्रीनारायण मंदिर से पधारे ब्रह्मसरोवर शनैश्चरी अमावस्या पर स्वामी मुक्तानंद ने पूजा अर्चना की। विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया। प्रवचन करते हुए स्वामी मुक्तानंद ने कहा की शनि अमावस्या का विशेष महत्व है। आज के दिन काली वस्तु का दान व स्नान करने से शनि देव व पित्र आत्माएं प्रसन्न होती हैं।
शनि अमावस्य का योग कभी-कभी आता है। इस दौरान अशोक शर्मा ने बताया कि सरसों के तेल का छाया पत्र दान करें। बहते पानी में नारियल विसर्जित करें। शनिवार को काले उड़द पीसकर उसके आटे की गोलियां बनाकर मछलियों को खिलाएं। उन्होंने कहा कि शनि अमावस्या को शनि देव को समर्पित किया जाता है। इस दिन शनि संबंधित वस्तुएं जैसे लोहा, तेल व काले वस्त्र आदि दान करने चाहिए। काले तिल, उड़द की दाल और लोहे की चीजों का दान करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं। शनि अमावस्या पर पूजा करते समय ओह्म शनैश्चराय नम मंत्र का 108 बार जाप करें और शनि देव के सामने दीपक जलाएं।