कुरुक्षेत्र। कैंटीन का संचालन करती महिलाएं। स्वयं
कुरुक्षेत्र। महिला सशक्तीकरण की दिशा में स्वयं सहायता समूह एक मजबूत आधार बनकर उभर रहे हैं। आज जिले में 3100 स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से करीब 35 हजार महिलाएं विभिन्न आर्थिक गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही हैं। 2014 में मात्र 10 से 15 समूहों से शुरू हुआ यह कारवां अब हजारों परिवारों के जीवन में आशा और खुशहाली का कारण बन चुका है।
इन समूहों की महिलाएं सिलाई-कढ़ाई, डेयरी, पापड़-बड़ी निर्माण, हर्बल उत्पाद, पैक्ड फूड, हैंडीक्राफ्ट और घरेलू उपयोगी सामान तैयार कर बाजार में बेच रही हैं। कई समूहों ने डिजिटल मार्केटिंग और सोशल मीडिया के माध्यम से अपने उत्पादों को बड़े स्तर पर पहचान दिलाई है। इससे न केवल महिलाओं की आय बढ़ी है बल्कि समाज में उनका सम्मान भी बढ़ा है। समूहों से जुड़ी महिलाएं नए रोजगार सृजित कर रही हैं। गांवों में इन समूहों की सफलता ने अन्य महिलाओं को भी प्रेरित किया है। कई महिलाएं अब आत्मविश्वास के साथ घरेलू जिम्मेदारियों के साथ-साथ व्यवसाय संभाल रही हैं।
बॉक्स
मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करना
जिला कार्यक्रम अधिकारी नरेश कुमार ने कहा कि स्वयं सहायता समूह का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और उनकी नेतृत्व क्षमता को विकसित करना है। सरकारी योजनाओं के साथ सहायता और प्रशिक्षण के जरिये महिलाओं को सशक्त किया जा रहा है। इसका परिणाम यह है कि हजारों महिलाएं रोजगार प्रदाता बन चुकी हैं।
सत्या देवी ने बताया कि मैंने 2014 में स्वयं सहायता समूह से जुड़कर मैकरम डोरी का अपना छोटा कारोबार शुरू किया। शुरुआत में सिर्फ तीन ऑर्डर मिले थे लेकिन आज मुख्य बाजारों में हमारे समूह के उत्पाद उपलब्ध हैं। समूह ने मुझे पहचान और सम्मान दिया है। अब मैं समूह की कई महिलाओं को प्रशिक्षित कर चुकी हूं। महिला ऊषा देवी ने बताया कि घरेलू चटनी, आचार, मसाले बनाने का काम आज मेरा पैशन बन चुका है। समूह से जुड़ने के बाद प्रशिक्षण मिला और लोन सुविधा मिली जिससे हमने छोटे स्तर पर यूनिट शुरू की। पहले मैं सिर्फ परिवार संभालती थी लेकिन अब मेरा नाम उद्यमी महिलाओं में लिया जाता है।
कुरुक्षेत्र। कैंटीन का संचालन करती महिलाएं। स्वयं