कुरुक्षेत्र। बैसाखी मेले में हरियाणवी परिधान में छात्राएं। संवाद
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कुरुक्षेत्र। राज्य स्तरीय बैसाखी मेले में 52 गज का दामण और 80 कली का घाघरा महिलाओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इन पारंपरिक परिधानों को देखकर महिलाओं ने अपने पुराने दौर की यादें साझा की। हिसार से आई महिलाओं ने बताया कि उनके यहां 52 गज का दामण और 80 कली का घाघरा दोनों प्रचलन में हैं। 80 कली का घाघरा विशेष रूप से राजस्थान में घूमर नृत्य के दौरान पहना जाता है। इस घाघरे में 80 अलग-अलग कपड़ों की कलियां जोड़ी जाती हैं। इसलिए इसे 80 कली का घाघरा कहते हैं जिससे यह अत्यधिक घेरदार और आकर्षक बनता है। यह घाघरा सांस्कृतिक कार्यक्रमों, शादियों और त्योहारों के दौरान विशेष रूप से पहना जाता है।
वहीं 52 गज के दामण को देखकर स्कूल की शिक्षिकाओं ने छात्राओं को इसके बारे में जानकारी दी। शिक्षिकाओं ने बताया कि बच्चों को इस पारंपरिक परिधान के महत्व का पता होना चाहिए कि हमारे बुजुर्गों का कैसा पहनावा था। छात्राओं ने कहा कि उन्होंने अब तक 52 गज का दामण केवल गानों में ही सुना था लेकिन आज पहली बार इसे करीब से देखा।
प्रो. महासिंह पूनिया ने छात्राओं को बताया कि यह लहंगा करीब सात से आठ किलोग्राम तक भारी होता है जिसे पुराने समय में महिलाएं पहनती थीं। उन्होंने कहा कि हरियाणा के कुछ क्षेत्रों में आज भी महिलाएं इसे पहनती हैं। उन्होंने बताया कि आज के दौर में नई पीढ़ी को इन पारंपरिक परिधानों के बारे में केवल गानों के माध्यम से ही जानकारी है।