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Kurukshetra News: दबखेड़ी की सत्या देवी बना रही हैं कान्हा जी की पोशाक, झूले और पालने

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कुरुक्षेत्र। सत्या देवी की दुकान पर रखी कान्हा जी की ड्रेस और पालने। स्वयं
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कुरुक्षेत्र। जिले के दबखेड़ी गांव की महिलाएं आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रही हैं। जन्माष्टमी के पावन पर्व पर आरती स्वयं सहायता समूह की सदस्य सत्या देवी और उनकी टीम लड्डू गोपाल की सुंदर-सजावटी पोशाकें, झूले, टोकरी, सिंहासन और पालने तैयार करने में जुटी हुई हैं। इन महिलाओं का कार्य न केवल स्थानीय स्तर पर सराहा जा रहा है बल्कि उनकी तैयार की गई वस्तुएं अब होलसेल दुकानों तक भी पहुंच रही हैं।
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सत्या देवी ने बताया कि उन्होंने यह कार्य वर्ष 2013 में शुरू किया था लेकिन बीते पांच वर्षों में उन्होंने इसे व्यावसायिक रूप दे दिया है। जन्माष्टमी के अवसर पर वे विशेष रूप से बाल गोपाल की फैंसी ड्रेस, झूले, रंगीन टोकरी, लकड़ी व कपड़े के सिंहासन और छोटे-छोटे पालने बनाकर बाजार में बेच रही हैं। ये सभी उत्पाद गांव में स्थित उनकी अस्थायी दुकान पर भी उपलब्ध हैं, जहां आसपास के गांवों से भी लोग खरीदारी करने आते हैं।

महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सत्या देवी अब तक 1200 से अधिक महिलाओं को इस शिल्प कला की ट्रेनिंग दे चुकी हैं। उन्होंने बताया कि पहले उन्होंने काम अपनी कुछ करीबी बहनों के साथ शुरू किया था लेकिन अब यह एक पूरे समूह का सामूहिक उपक्रम बन गया है। प्रशिक्षण पाने के बाद कई महिलाएं अपने-अपने गांवों में इसी कार्य से रोजगार कमा रही हैं और अपने परिवार का आर्थिक सहयोग कर रही हैं। गांव की अन्य महिलाएं भी इस कार्य में हाथ बंटा रही हैं और समूह के जरिये वे कढ़ाई, सिलाई, सजावट और डिजाइनिंग जैसे कामों में निपुण हो चुकी हैं।

कुरुक्षेत्र। सत्या देवी की दुकान पर रखी कान्हा जी की ड्रेस और पालने। स्वयं

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