प्रख्यात हिंदी फिल्म दिवाना मस्ताना के पप्पू पेजर नाम से मशहूर एवं महेंद्रगढ़ के दनोदा गांव के रहने वाले सतीश कौशिक के निधन की वीरवार सुबह ही जब खबर आई तो पूरा कला जगत हिल गया। भले ही वे लंबे समय से फिल्म अभिनेता से लेकर निर्माता-निर्देशक के तौर पर भी बॉलीवुड में अपनी कला का लोहा मनवा रहे थे, लेकिन वे हरियाणा के हर कलाकार से सीधे जुड़े थे।
यहां हरियाणा फिल्म प्रमोशन बोर्ड के अध्यक्ष के साथ-साथ उन्होंने हरियाणवी कला को बढ़ावा देने के हर संभव प्रयास किए। हरियाणवी फिल्म छोरियां छोरों से कम नहीं होती में निर्देशन व अभिनय भी किया। यहां तक कि ब्रह्मसरोवर के आसपास ही इस फिल्म की शूटिंग भी की। चार माह 11 दिन पहले ही कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ऑडिटोरियम के मुंख्य मंच पर रत्नावली महोत्सव में भी पहुंचे, जहां हर कोई उनका दिवाना दिखा। उन्होंने मंच पर सबसे पहले पप्पू पेजर का ही डॉयलॉग बोला था, जिस पर ऑडिटोरियम गूंज उठा था।
28 अक्तूबर को जब सतीश कौशिक केयू पहुंचे तो उनके समक्ष लोक रंग हरियाणा के आइटम की प्रस्तुति दी गई। 20 मिनट के इस आइटम में कलाकारों ने जब रंग जमाया तो सतीश कौशिक दंग रह गए। उन्होंने मंच पर कहा था, ये है असली हीरो। हिंदी फिल्मों के बड़े हीरो में भी कई बार रि-टेक लेते हैं, लेकिन इन कलाकारों ने असंभव को ही संभव कर दिखाया।
चला गया फिल्म जगत का कोहिनूर: डॉ महा सिंह
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय युवा एवं सांस्कृतिक विभाग के निदेशक डॉ महा सिंह पूनिया का कहना है कि पहले रूंडा व खुंडा हरियाणवी फिल्म जगत के बड़े चेहरे चले गए और अब हरियाणा के साथ-साथ पूरे फिल्म जगत का ही कोहिनूर सतीश कौशिक चला गया। ऐसे कलाकारों की भरपाई कभी नहीं हो सकती।
बताते हैं कि उनका सतीश कौशिक के साथ सीधा जुड़ाव रहा और होली पर्व पर भी उन्होंने बधाई संदेश भेजा था। अभी रंगों का पर्व मना ही रहे थे कि उनके निधन से हर कोई बेरंग हो गया। 28 अक्तूबर को केयू पहुंचने पर उन्होंने रत्नावली महोत्सव के साथ-साथ केयू की भी जमकर तारीफ की थी और भरोसा दिया था कि वे अगले साल अनुपम खेर को साथ लेकर यहां पहुंचेंगे।