कुरुक्षेत्र। पवित्र सरस्वती नदी लोगों की गहरी आस्था का प्रतीक ही नहीं बल्कि यह पानी संरक्षित करने का भी बड़ा माध्यम बन चुकी है। पिछले वर्ष ही बारिश के मौसम में करीब 20 करोड़ लीटर जल संरक्षित किया था, जिससे भूजल स्तर में भी सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है। ऐसे में अब केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय जल पुरस्कार मिलने की उम्मीद भी जगी है।
हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड पिछले करीब सात साल से न केवल लुप्त हो चुकी सरस्वती नदी के जीर्णोद्धार में लगा है बल्कि इसे नया रूप देने में भी सफल रहा है। यही नहीं सरस्वती के प्रति लोगों की आस्था बढ़ी है तो जल सरंक्षण का भी यह बड़ा माध्यम बनी है। ऐसे में सरस्वती हैरिटेज बोर्ड की ओर से कुछ दिनों पहले ही राष्ट्रीय जल पुरस्कार के लिए आवेदन किया गया था, जो केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा स्वीकार कर लिया गया है। यही नहीं मंत्रालय की ओर से एक टीम हकीकत जानने के लिए गत सप्ताह ही यहां पहुंची थी।
इस टीम में मंत्रालय के उप सचिव दलबीर सिंह, केंद्रीय जल आयोग के उप निदेशक आकांक्षा, वरिष्ठ वैज्ञानिक कुलदीप सिंह व चेतन चौहान भी शामिल थे। टीम ने यहां न केवल अलग-अलग जगहों पर सरस्वती के जीर्णोद्धार को देखा बल्कि इसके जरिए किए जाने वाले जल संरक्षण के उपाय भी जांचे। यहां तक कि पानी के नमूने भी लिए गए। इस दौरान टीम ने भी माना कि सरस्वती का पानी बचाने में अहम योगदान है। इससे आमजन को बड़ा फायदा मिलने वाला है।
इन तालाबों के जरिए रिचार्ज किया 20 करोड़ लीटर पानी
सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड की ओर से विशेष तौर पर बारिश के दिनों में पहाड़ों से आने वाले पानी को संरक्षित कर भूजल के तौर पर रिचार्ज करने के लिए मरचेहड़ी, रामपुरा व बोहली गांवों में तालाब बनाए थे। जहां पिछले वर्ष ही बारिश के सीजन में करीब 20 करोड़ लीटर पानी रिचार्ज होने का दावा किया गया।
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केंद्रीय भूजल बोर्ड ने भी माना जल सरंक्षण का बेहतर स्रोत : अरविंद
सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के एक्सईएन अरविंद कौशिक का कहना है कि सरस्वती नदी के जरिए और भी बड़े स्तर पर जल संरक्षण किए जाने की योजना पर कार्य किया जा रहा है। यहां तक कि केंद्रीय भूजल बोर्ड ने भी माना है कि सरस्वती जल संरक्षण के लिए बेहतर स्त्रोत है। उक्त तालाबों की तर्ज पर 12 और तालाब विकसित किए जाने के लिए चिह्नित किए गए हैं। एक तालाब को विकसित किए जाने पर करीब चार से छह लाख रुपये तक खर्च आता है।