पिहोवा। सत्कार रसोई स्टॉल पर खाना बनाती महिलाएं । संवाद
पिहोवा। महिलाएं आज चूल्हे चौके से आगे बढ़कर हर क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ रही हैं। महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर सशक्त होने के साथ परिवार के लिए भी बड़ा सहारा बन रही हैं। यही नहीं आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं।
जींद की रहने वाली मंजू, रश्मी व उषा ने भी आत्मनिर्भरता की खास मिसाल पेश की है। उन्होंने चूल्हे को ही इस कदर अपनाया कि इस पर बनाए जाने वाले व्यंजनों का जायका पूरे प्रदेश व देश में फैलने लगा। खुद स्वावलंबी बनीं और दूसरी महिलाओं के लिए भी आदर्श बन गईं। अब ये महिलाएं सरस्वती तीर्थ के पावन तट पर अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव में पहुंची हैं। हरियाणा ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत नारी शक्ति महिला क्लस्टर संगठन के स्वयं सहायता समूह के साथ उन्होंने यहां सत्कार रसोई के नाम से अपना स्टॉल स्थापित किया। स्टॉल पर हाथ से बने खाद्य पदार्थ पर्यटकों की पहली पसंद बने हुए हैं। सरकार की ओर से इन समूहों को स्वरोजगार स्थापित करने के लिए बैंकों के माध्यम से आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है।
स्टॉल पर पर्यटकों को अपने उत्पाद परोस रही मंजू जींद, रश्मि, रीना और उषा ने बताया कि वे पहली बार इस महोत्सव में आई हैं। उन्होंने देसी घी चुरमा, बाजरे की खिचड़ी, बाजरे की रोटी-सरसों का साग, देसी घी की जलेबी और अन्य व्यंजन पेश किए। पर्यटक और वीवीआईपी लोग उनके हाथों के बने व्यंजनों की खूब प्रशंसा कर रहे हैं।
महिलाओं ने कहा कि यह मंच उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर देता है और जीवन स्तर सुधारने में मदद करता है। रस्मी मारुति सेफ हेल्प ग्रुप ने बताया कि वे स्वादिष्ट आचार और देसी घी चुरमा स्पेशल बनाती हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के महोत्सव से महिलाओं को अपनी छिपी प्रतिभा को निखारने और आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।
पिहोवा। सत्कार रसोई स्टॉल पर खाना बनाती महिलाएं । संवाद