शाहाबाद। मीरी-पीरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर में वेतन को लेकर विवाद फिर गहराता दिखाई देने लगा है। पिछले तीन माह से लंबित वेतन को लेकर कर्मचारियों ने अपने संघर्ष को संगठित रूप देने के लिए मीरी-पीरी कर्मचारी संघर्ष समिति का गठन किया है, जिसकी अगुवाई 11 सदस्यीय कमेटी करेगी। समिति के नेतृत्व में तीन जुलाई से संस्थान परिसर में अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण धरना शुरू किया जाएगा। संघर्ष समिति के सदस्यों ने बताया कि लंबे समय से वेतन नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों और उनके परिवारों को गंभीर आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार संबंधित पक्षों से मांग उठाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ, जिसके चलते अब आंदोलन का रास्ता अपनाना मजबूरी बन गया है।
धरना पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन इसका असर संस्थान की नियमित स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा। कर्मचारियों के अनुसार ओपीडी और आईपीडी सेवाएं प्रभावित होंगी। हालांकि मरीजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इमरजेंसी सेवाओं को बाधित नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए विशेष व्यवस्था की गई है ताकि आपातकालीन स्थिति में आने वाले मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
कर्मचारियों का कहना है कि मीरी-पीरी संस्थान के प्रबंधन को लेकर एसजीपीसी और हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एचएसजीएमसी) के बीच चल रहे विवाद का खामियाजा कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है।
प्रमुख मांगे
धरने के दौरान तीन प्रमुख मांगें प्रशासन एवं संबंधित प्रबंधन के समक्ष रखी जाएंगी। पहली, पिछले तीन माह से लंबित वेतन का तत्काल भुगतान किया जाए, कर्मचारियों के भविष्य को लेकर स्पष्ट निर्णय लिया जाए कि संस्थान का संचालन और वेतन भुगतान की जिम्मेदारी एसजीपीसी निभाएगी या एचएसजीएमसी व कर्मचारियों के वेतन भुगतान की एक निश्चित एवं स्थायी तिथि घोषित की जाए।
4 करोड़ 20 लाख रुपये वेतन बकाया
वेतन संकट का असर अब संस्थान के स्टाफ पर भी साफ दिखाई देने लगा है। 12 मई को न्यायालय द्वारा प्रबंधन संबंधी फैसला हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पक्ष में आने के समय संस्थान में लगभग 375 से 380 कर्मचारी कार्यरत थे लेकिन पिछले करीब दो माह से वेतन नहीं मिलने के कारण कई कर्मचारी नौकरी छोड़ चुके हैं। वर्तमान में संस्थान में कर्मचारियों की संख्या घटकर करीब 335 से 340 रह गई है। स्टाफ की संख्या कम होने के कारण संस्थान का मासिक वेतन व्यय भी घटा है। पहले कर्मचारियों का कुल मासिक वेतन लगभग 1 करोड़ 50 लाख रुपये था, जो अब घटकर करीब 1 करोड़ 25 लाख से 1 करोड़ 30 लाख रुपये प्रतिमाह रह गया है। कर्मचारियों का करीब 4 करोड़ 20 लाख रुपये वेतन बकाया हो चुका है।