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सैनिक स्कूल देश के भविष्य के रक्षकों की सीढ़ी है : सुरेश कुमार

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कुरुक्षेत्र। श्री जयराम सैनिक स्कूल में प्रशासनिक अधिकारी सूबेदार मेजर सुरेश कुमार (सेवानिवृत्त) ने कहा कि सैनिक स्कूल भारतीय सशस्त्र बलों की वर्दी पहनने का सपना देखने वाले युवाओं की आकांक्षाओं को पोषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।
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उन्होंने सैनिक स्कूलों पर चर्चा में कहा कि ये संस्थान अनुशासन, चरित्र निर्माण और शैक्षणिक उत्कृष्टता के गढ़ हैं। ये न केवल ज्ञान प्रदान करते हैं, बल्कि नेतृत्व, साहस और निष्ठा जैसे मूल्यों का भी संचार करते हुए, भावी सैन्य अधिकारियों की नींव रखते हैं। सुरेश कुमार ने कहा कि एक महत्वाकांक्षी कैडेट से कमीशन प्राप्त अधिकारी बनने का सफ़र चुनौतियों और त्यागों से भरा होता है और सैनिक स्कूल की शिक्षा इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने बताया कि सैनिक स्कूलों की स्थापना मुख्यतः युवा मस्तिष्कों को भारतीय सशस्त्र बलों में कैरियर के लिए तैयार करने के उद्देश्य से की गई थी।
उन्होंने बताया कि सैनिक स्कूल में प्रवेश पाने के लिए, उम्मीदवारों को पहले प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है, जो गणित, अंग्रेजी और सामान्य ज्ञान जैसे विषयों में उनके ज्ञान का मूल्यांकन करती है।
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इस परीक्षा में सफलता सैनिक स्कूल शिक्षा की दुनिया में कदम रखने की कुंजी है, जहां से भविष्य की यात्रा शुरू होती है। प्रशासनिक अधिकारी सुरेश कुमार ने कहा कि सैनिक स्कूल में अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद छात्र राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) या अन्य सैन्य अकादमियों में शामिल होते हैं।
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