सरकार के 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बंद करने के फैसले से भले ही लोगों को परेशानी झेलने को मजबूर होना पड़ रहा है, लेकिन बिजली निगम की चांदी हो गई। निगम के खजाने में महज पांच दिनों में उपभोक्ताओं की ओर से 3 करोड़ 66 लाख 43 हजार रुपये जमा हुए। डिफॉल्टरों के पैसे और पुराने बकाया की आमद से बिजली निगम ने रात नौ बजे तक बिल काउंटर खुले रखे, ताकि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े और अधिक से अधिक उपभोक्ता अपना बिल भुगतान कर सकेे।
11 नवंबर को ही हुआ 1 करोड़ 88 लाख का बिल भुगतान
11 नवंबर को सबसे अधिक 1 करोड़ 88 लाख रुपये बिजली बिलों भरा गया। वहीं 12 नवंबर का आंकड़ा 91 लाख 70 हजार रुपये रहा। सरकार का नोट बैन का फैसला निगम को खूब रास आ रहा है। बिजली निगम के अधिकारी ने बताया कि जो लोग कहने और नोटिसों के बावजूद बिल नहीं भरते थे वहीं सैकड़ों डिफॉल्टरों ने लाइन में खड़े होकर निगम के पैसे का भुगतान किया। 1 से 13 नवंबर तक 8 करोड़ 45 लाख 22 हजार रुपये की आमदनी बिजली बिलों से निगम को हो चुकी है। इसमें करीब पौने चार करोड़ रुपये के बिलों का भुगतान सिर्फ पांच दिन में ही हुआ। वहीं 1 से 8 नवंबर तक आठ दिनों में 4 करोड़ 78 लाख रुपये का ही बिल भुगतान हुआ था।