कुरुक्षेत्र। नये बस स्टैंड परिसर में खड़ी रोडवेज की बसें। संवाद
कुरुक्षेत्र। रोडवेज कर्मचारियों के लिए बसों का संचालन करना मुश्किल हो गया है। विभाग के नियम के अनुसार बस में 52 से ज्यादा सवारियां नहीं बैठनी चाहिए लेकिन रूटों पर यात्रियों की संख्या अधिक होने से ये नियम ही समस्या बन गए हैं। हालात यह है कि अगर किसी बस में निर्धारित क्षमता से ज्यादा सवारियां पाई जाती हैं तो विभागीय अधिकारी चालक और परिचालक का चालान कर रहे हैं।
रोडवेज कर्मचारियों का कहना है कि जब हर बस स्टॉप पर गाड़ी रोकने का आदेश है तो सवारियों को चढ़ने से कैसे रोका जा सकता है। यदि वे यात्रियों को मना करते हैं तो यात्री उनकी शिकायत कर देते हैं और यदि बस में बैठने देते हैं तो विभाग चालान कर देता है। ऐसे में कर्मचारी बीच में फंस जाते हैं।
कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि विभाग बिना वजह कर्मचारियों को परेशान कर रहा है। उनका कहना है कि सड़क पर बस रोकना और यात्रियों को बैठाना विभाग का ही आदेश है लेकिन बाद में चालान काटकर दोष कर्मचारियों पर मढ़ दिया जाता है।
कर्मचारियों को बनाया जा रहा निशाना : नरेंद्र
ऑल हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन के प्रधान नरेंद्र पांचाल ने कहा कि कर्मचारियों को जानबूझकर टारगेट किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सीटें फुल होने के बाद भी जब बस स्टॉप पर बस रुकती है तो यात्री चढ़ जाते हैं। ऐसे में कंडक्टर मना नहीं कर सकता। अगर मना करेगा तो यात्री शिकायत कर देंगे। ऐसे हालात में कर्मचारी की गलती कहां है। विभाग को इस दोहरी नीति को बदलना चाहिए।
यात्रियों के हित को प्राथमिकता दें : शेर सिंह
रोडवेज महाप्रबंधक शेर सिंह का कहना है कि रोडवेज विभाग जनता की सुविधा के लिए काम करता है। चालक और परिचालक का कर्तव्य है कि यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को चाहिए कि बस संचालन में ऐसी व्यवस्था बनाएं जिससे यात्रियों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
कुरुक्षेत्र। नये बस स्टैंड परिसर में खड़ी रोडवेज की बसें। संवाद