शहर के गांधी नगर में लाखों रुपये की लागत से बनी सड़क पर ‘आशंका की पट्टी’ लगी है। इस सड़क की लागत और अन्य जानकारी को लेकर लगाया गया बोर्ड ही इस आशंका को बल दे रहा है। इसमें लागत राशि में लगभग 20 लाख का अंतर दिखाया गया है। हालांकि अधिकारी इसे पेंटर से हुई गलती मान रहे हैं, लेकिन इस पर लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
इस सड़क किनारे राज्यमंत्री कृष्ण बेदी का निवास है। गांधी नगर में 17 नवंबर 2015 को झांसा रोड स्थित रविदास चौक से गांधी नगर होते हुए रेलवे लाइन तक की सड़क के निर्माण का कार्य शुरू किया गया था। इसका उद्घाटन थानेसर के विधायक ने किया। इस दौरान सड़क निर्माण से संबंधित सभी जानकारियां पीडब्ल्यूडी विभाग ने बोर्ड पर दीं। निर्माण लागत को 50.23 लाख रुपये दिखाया गया। यह सड़क 16 अप्रैल 2016 को बनकर तैयार होनी थी, लेकिन जुलाई माह तक तैयार हो पाई।
इस बीच, सड़क निर्माण के बीच में अधिकारियों ने सड़क निर्माण से संबंधित बोर्ड में अंकित 50.23 लाख की राशि की जगह स्लिप चस्पा कर उस पर पेन से 31 लाख रुपये लिख दिया। वहीं दो माह बाद बारिश के आने से बोर्ड के एक हिस्से पर चस्पाई गई स्लिप धुलकर नष्ट हो गई। इससे बोर्ड पर एक तरफ 50.23 लाख तो एक तरफ खाली स्लिप ही दिखाई दे रही है। इस कारण यह बोर्ड एक आशंका की ओर इशारा कर रही है।
राज्यमंत्री तक पहुंचा मामला, नहीं हुई कार्रवाई
गांधी नगर के समाजसेवी नरेश ने बताया कि उन्होंने इस बाबत राज्यमंत्री से कई बार शिकायत भी दी है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इसके लिए ठेकेदार से भी संपर्क स्थापित किया गया था, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया है। वहीं रामकुमार ने कहा कि इस कॉलोनी में ठेकेदार ने मनमर्जी से ब्लॉक लगाए हुए हैं, जो परेशानी का सबब बन रहा है। आरोप है कि पूरी सड़क निर्माण में कहीं भी सही लेवल नहीं किया है। इससे सड़क ऊंची नीची हो गई है। बारिश में पानी जमा हो जाता है। अनिल शर्मा ने कहा कि सड़क निर्माण के लिए निर्धारित से ज्यादा समय ले लिया है लेकिन निर्माण पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि यहां पर कार्यरत ठेकेदार अपनी सुविधा अनुसार सड़क बना रहा है। कहीं तो सड़क कच्चे रास्ते पर 5 फीट की बनाई गई लेकिन कई जगह 2 फीट की ही बनाकर रख दी है।
सड़क की अनुमानित लागत 30 लाख के आसपास है। पहले गलती से 50 लाख रुपये के एस्टीमेट का बोर्ड लगा दिया गया था, जो पट्टी लगाकर दुरुस्त किया गया है। हो सकता है कि बोर्ड के एक तरफ पट्टी लगा दी गई हो और एक तरफ न लगी हो। यह सड़क 900 मीटर की है। इस सड़क पर मंत्री के कहने पर तीन बार सड़क बनाई गई है। रही बात सड़क बनाने की, जहां पर 5 फीट कच्ची जगह थी वहां पर सड़क बना दी गई है वहीं जहां पर जगह ही दो फीट की बची थी, वहां पर उतनी ही सड़क बना दी गई है।
- प्रेम प्रताप, ठेकेदार, प्रताप कंस्ट्रक्शन कंपनी
रविदास चौक से गांधी नगर से होते हुए रेलवे लाइन तक बनी सड़क में ठेकेदार ने काम समय पर नहीं किया है। इसलिए अभी तक पेमेंट जारी नहीं की गई है। वहीं जब निर्माण शुरू हुआ था तब गलती से पेंटर ने बोर्ड पर 51 लाख रुपये की लागत राशि अंकित कर दी थी। सड़क बनने के कुछ समय बाद ही बोर्ड पर 31 लाख की लागत का स्टीकर लगा दिया गया था। वहीं अब सड़क निर्माण पूरा हो गया है। जल्द ही 31 लाख की लागत का पेंट उसी लागत स्थान पर करा दिया जाएगा।
- एसपी सरोहा, एक्सईएएन, पीडब्ल्यूडी विभाग