इन दिनों जिले में प्रशासन का दोहरा रवैया देखने को मिल रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों ने ऐसी व्यवस्था बनाई है कि ग्रामीण तबके से ज्यादा शहरवासियों को तथा निर्माण से ज्यादा कचरे को तवज्जों दी गई। हालांकि पहली समस्या को हल किए बगैर इस दायरे में नई व्यवस्था करने की बात भी यहां फिट बैठती नहीं दिख रही। उसपर प्रशासन का दोहरा रवैया भी आमजन की समझ से परे है। जिस दायरे में पिपली-लाडवा रोड पर जमीन पर मालिकाना हक होने के बावजूद आमजन को टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की ओर से निर्माण नहीं करने दिया जा रहा, जिला प्रशासन ने उसी दायरे में किराए पर जमीन लेकर और उसमें वेस्टेज प्लांट लगाकर शहर के सभी सेक्टर, कॉलोनियों तथा मोहल्लों का कचरा धड़ल्ले से फिकवाया जा रहा है। इससे न केवल सड़क के निकट गंदगी को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि शहर की तर्ज पर ग्रामीण क्षेत्र में विकास करने के दावे को भी प्रशासन ने ही खुद ब खुद चुनौती दे डाली है।
गौरतलब है कि पिपली-लाडवा हाइवे रोड पर जिला प्रशासन द्वारा गांव मथाना के निकट 30 मीटर दायरे में नगर परिषद थानेसर के अंतर्गत आने वाले विभिन्न क्षेत्रों का कचरा, कूड़ा-करकट आदि गिराने की व्यवस्था की गई है, लेकिन इसी दायरे में हाइवे के दोनों तरफ अपनी ही जमीन या प्लाटों पर प्रशासन द्वारा आम लोगों को निर्माण नहीं करने दिया जा रहा।
जबकि नगर परिषद के कार्य को गति देने के लिए प्रशासन द्वारा यहां कचरा गिराने की व्यवस्था जरूर कर दी गई। इससे साफ जाहिर है कि शहरवासियों को सुविधा मुहैया कराने के लिए नीतियां एवं योजनाएं बनाने को लेकर प्रशासन किस तरह गंभीर है, जबकि ग्रामीण तबका गुहार लगाने के बावजूद योजनाओं एवं विकास को तरस रहा है।
शहरवासियों को दे रहे सुविधा तो ग्रामीणों को क्यों नहीं
पिपली-लाडवा रोड पर के साथ लगती जमीन व प्लाट के मालिक पिपली वासी रोहित ढांडा तथा मथाना वासी मांगेराम, रामरतन, रणजीत सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्र से रामपाल, अमित, संजय, प्रेम सिंह, राजकुमार, महेंद्र सैनी आादि का कहना है कि मुख्यमंत्री से लेकर अन्य केबिनेट मंत्रियों तक गुहार लगाने के बावजूद प्रशासन ने ग्रामीण तबके की हाइवे के निकट निर्माण की समस्या को हल करने पर कोई ध्यान नहीं दिया। जबकि हर रोज प्रचार किया जा रहा है कि प्रदेश विकास में आगे बढ़ रहा है, लेकिन इससे ज्यादा दुर्भाग्य की बात क्या होगी कि आमजन को उन्हीं की खरीदी हुई जमीन पर निर्माण नहीं करने दिया जा रहा। उन्होंने आवाज उठाई कि शहरवासियों को सुविधा देने के लिए रोड के निकट 30 मीटर दायरे में वेस्टेज के लिए व्यवस्था तो कर दी गई, लेकिन इससे पहले की समस्या ज्यों का त्यों छोड़ दी। प्लाट धारकों द्वारा सरकार को राजस्व देने, तहसीलदार द्वारा रजिस्ट्री करने और पटवारी द्वारा इंतकाल के बाद पूरी तरह मालिकाना हक होने के बावजूद भी उन्हीं की जमीन पर निर्माण नहीं करने दिया जा रहा, जबकि शहर का कचरा गिराने की प्रशासन ने बेझिझक खुली छूट दे दी। उन्होंने प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि केवल शहरवासियों के लिए ही नहीं बल्कि पिपली-लाडवा रोड पर ग्रामीण तबके के प्रभावित लोगों के लिए भी योजना बनाई जाए। उन्हें भी अपनी जमीन पर निर्माण करने की अनुमति दी जाए।
क्या कहते है नगर परिषद के ईओ
नगर परिषद थानेसर के ईओ एसके चौहान ने बताया कि पिपली-लाडवा रोड पर गांव मथाना की लगभग पांच एकड़ भूमि में वेस्टेज प्लांट शुरू किया गया है। यहां नप के अंतर्गत शहर का कचरा फिकवाया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा यह व्यवस्था की गई है। जब तक पूरा एरिया फिल नहीं हो जाता, कचरा गिरता रहेगा।
अस्थाई तौर पर की है व्यवस्था : सुमेधा
डीसी सुमेधा कटारिया का कहना है कि गांव मथाना के पास शहर का कचरा फेंकने की व्यवस्था केवल अस्थाई तौर पर की गई है। वहीं जो लोग पिपली-लाडवा रोड पर इस दायरे में निर्माण नहीं कर पा रहे, उनको लेकर भी कोई योजना बनाए जाने के प्रश्न पर उन्होंने चुप्पी साध ली।