कुरुक्षेत्र। जिले में टीबी के वयस्क मरीजों को बीसीजी (बैसिलस कैलमेट-गुएरिन) टीकाकरण से वंचित रहना पड़ेगा। कारण कि टीबी मुक्त भारत अभियान में कुरुक्षेत्र को शामिल नहीं किया गया है, जबकि पड़ोसी जिले कैथल और अंबाला समेत प्रदेश के 11 जिलों को शामिल किया है, जहां टीबी के वयस्क मरीजों काे बीसीजी की डोज दी जाएगी।
जिले में टीबी के मरीजों की संख्या में प्रति वर्ष इजाफा हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक गत वर्ष यहां टीबी के 2097 मामले सामने आए थे। इसमें 95 मरीजों की मौत हो चुकी है। इस साल के पहले 39 दिन में ही टीबी के 206 मरीज सामने आ चुके हैं, जबकि एक टीबी मरीज की जान भी गई है। वहीं दो दिन पहले जिला जेल में भी संदिग्ध टीबी रोगी की मौत का मामला सामने आया था, हालांकि उसकी पोस्टमार्टम और विसरा रिपोर्ट आनी बाकी है। फिलहाल कुरुक्षेत्र में टीबी के 882 मरीज सक्रिय हैं। जिला क्षय केंद्र से इन मरीजों को उपचार दिया जा रहा है। साल 2022 की तुलना में पिछले वर्ष जिले में 167 टीबी मरीज ज्यादा मिले थे, जबकि 98 टीबी मरीजों की मौत हुई थी।
विदित हो कि भारत को टीबी मुक्त करने के उद्देश्य से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आदेश पर वयस्क टीबी मरीजों को डोज दी जाएगी। इसमें 18 से अधिक उम्र के छह वर्गों के लोगों को बीसीजी की एक डोज दी जानी है। हालांकि यह डोज टीबी मरीज की सहमति के बाद दी जाएगी। वर्तमान में बीसीजी की डोज बच्चे के जन्म के साथ ही दी जाती है। उम्र के साथ उसका असर कम होने लगता है।
लाभार्थी और मरीज के बीच की जाएगी तुलना
जिला क्षय एवं कुष्ठ अधिकारी डॉ. संदीप अग्रवाल ने बताया कि यह अभियान टीबी मुक्त भारत के लिए चलाया जा रहा है। चयनित 11 जिले में टीबी के वयस्क मरीजों को भी बीसीजी की डोज दी जाएगी। उसके बाद डोज लेने वाले लाभार्थी और बगैर डोज लेने वाले के बीच तुलना की जाएगी। यह एक तरह का परीक्षण है। जिला कुरुक्षेत्र को इसमें शामिल नहीं किया गया है।