कुरुक्षेत्र। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश महावीर सिंह की अदालत ने चेक बाउंस मामले में भगोड़ा घोषित एक व्यक्ति को राहत देते हुए उसके खिलाफ धारा 174 ए आईपीसी के तहत हुई सजा को रद्द कर दिया। अदालत ने प्रक्रियागत खामियों और मुख्य मामले में हुए समझौते को आधार मानते हुए आरोपी प्रभु दयाल को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया।
प्रभु दयाल के खिलाफ थाना सिटी थानेसर में वर्ष 2019 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। आरोप था कि वह धारा 138 नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के तहत चल रहे चेक बाउंस मामले में अदालत में पेश नहीं हुआ, जिसके बाद 15 जून 2019 को उसे भगोड़ा अपराधी घोषित (प्रोक्लेम्ड पर्सन) घोषित कर दिया गया था। इसके आधार पर उसके खिलाफ धारा 174 ए आईपीसी के तहत मामला दर्ज हुआ। बाद में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कुरुक्षेत्र की अदालत ने 25 नवंबर 2022 को उसे दोषी करार देते हुए छह माह के साधारण कारावास और दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसी फैसले को चुनौती देते हुए प्रभु दयाल ने सेशन कोर्ट में अपील दायर की थी। अपील की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि संबंधित अदालत ने केवल आदेश की प्रति पुलिस को भेजकर प्राथमिकी दर्ज करवाई, जबकि कानून के अनुसार धारा 195(1)(ए)(आई) सीआरपीसी के तहत अदालत की औपचारिक लिखित शिकायत आवश्यक थी। बचाव पक्ष ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के कई फैसलों का हवाला भी दिया।
सेशन कोर्ट ने अपने फैसले में माना कि प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण थी। अदालत ने कहा कि केवल आदेश की प्रति भेजना पर्याप्त नहीं था और संबंधित न्यायालय की विधिवत शिकायत के बिना धारा 174 ए आईपीसी के तहत संज्ञान नहीं लिया जा सकता था। अदालत ने यह भी माना कि जिस मूल चेक बाउंस मामले में प्रभु दयाल को भगोड़ा अपराधी बनाया गया था, उसी मामले में बाद में समझौता हो गया था और अपील में उसे बरी कर दिया गया था। ऐसे में इस तथ्य का लाभ भी आरोपी को मिलना चाहिए।
इन परिस्थितियों को देखते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश महावीर सिंह ने निचली अदालत के दोषसिद्धि और सजा संबंधी आदेशों को निरस्त करते हुए प्रभु दयाल को बरी कर दिया। अदालत ने जमा जुर्माना राशि भी नियमानुसार लौटाने के आदेश दिए हैं। संवाद