शुक्रवार को ट्रिब्यूनल की टीम ने पंजाब के रोपड़ स्थित लोहड़ हेड पर हरियाणा को मिलने वाले वास्तविक पानी की स्थिति का जायजा लिया था। रविवार को करनाल के मूनक हेड पर यमुना लिंक नहर का जायजा लिया जाएगा, जहां से दिल्ली को पानी की आपूर्ति होती है। इसके बाद तीनों दिनों के निरीक्षण को जोड़कर ट्रिब्यूनल पूरी स्थिति का मूल्यांकन करेगा। हरियाणा सिंचाई विभाग के अधिकारी राज्य और केंद्र सरकार को टि्रब्यूनल के तीन दिवसीय दाैरे का ब्योरा भेजेंगे।
टि्रब्यूनल की टीम का तीन दिवसीय दाैरा रावी-ब्यास जल विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जोकि मुख्य रूप से सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर के निर्माण और पानी के बंटवारे पर केंद्रित है। पंजाब अधिक पानी की मांग पर अड़े हुए हैं, जबकि हरियाणा 3.5 एमएएफ पानी की मांग कर रहा है। ट्रिब्यूनल इन निरीक्षणों और तथ्यों के आधार पर सभी कानूनी पक्षों का अवलोकन कर अंतिम निर्णय की ओर बढ़ने के आसार हैं।
हरियाणा को राजीव लोंगेवाल समझौते के करीब 40 बाद भी समझौते का आधा पानी मिल रहा है। पंजाब के पास पूरे पानी को खपाने के लिए कोई नहर भी नहीं है। इसके बाद भी हरियाणा को उसके हक का पानी नहीं मिल रहा। हरियाणा को 3.5 एमएएफ पानी मिलना चाहिए लेकिन अभी तक 1.88 एमएएफ पानी मिल रहा है। बुडेढ़ा हेड की क्षमता 14 हजार क्यूसेक से ज्यादा की है परंतु यहां अभी तक साढ़े छह हजार क्यूसेक के करीब ही पानी आता है। टीम के दाैरे के दाैरान उपायुक्त राम कुमार मीणा भी साथ रहे।
सिंचाई विभाग के उच्च अधिकारियों ने ट्रिब्यूनल के सदस्यों के सामने कहा कि अगर पंजाब उन्हें भाखड़ा डेम से एसवाईएल का निर्माण कर उनके हिस्से का रावी ब्यास का पानी उन्हें दें तो दक्षिण हरियाणा के छह जिलों में सीधे जल संकट दूर होगा। दूसरे जिलों को भी लाभ होगा। हरियाणा के अधिकारियों ने यह भी तर्क दिया कि पानी पूरा मिलने से भूजल स्तर के गिरने की स्थिति में सुधार होगा।