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रत्नावली महोत्सव : आर्य पीजी कॉलेज पानीपत रहा ओवर ऑल चैंपियन

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कुरुक्षेत्र। चार दिवसीय रत्नावली महोत्सव का मंगलवार को रंगारंग कार्यक्रम के साथ समापन हुआ, जिसमें ओवर ऑल चैंपियन आर्य पीजी कॉलेज पानीपत रहा जबकि फाइन आर्ट्स इवेंटस की ओवरऑल ट्राफी की विजेता कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी कैंपस टीम रही। थियेटर इवेंटस की ओवरऑल ट्रॉफी संयुक्त रूप से आरकेएसडी पीजी कॉलेज कैथल व आर्य पीजी कॉलेज पानीपत को, लिटरेरी इवेंट्स की ओवरऑल ट्रॉफी गवर्नमेंट कॉलेज जींद को मिली जबकि ओवर ऑल रत्नावली रनरअप ट्राफी कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी कैंपस टीम ने हासिल की। देर शाम हुए समापन समारोह में स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संगठक सतीश मुख्यातिथि व प्रख्यात फिल्म अभिनेता व दादा लख्मीचंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफोर्मिंग एंड विज़यूअल आर्ट्स, रोहतक के कुलपति गजेंद्र चौहान विशिष्ट अतिथि रहे, जिन्होंने विजेता कलाकारों को सम्मानित किया।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने की। उन्होंने कहा कि हरियाणा की युवा पीढ़ी रत्नावली के माध्यम से हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत को जिंदा रखने का काम कर रही है। ऐसी पीढ़ी पर प्रदेश के हर व्यक्ति को नाज है। मुख्यातिथि स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संगठक सतीश ने कहा कि हमारी संस्कृति बहुत श्रेष्ठ व समृद्ध है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के रत्नावली समारोह से देश व प्रदेश में इस विश्वविद्यालय की एक पहचान है। इस उत्सव के माध्यम से यह विश्वविद्यालय हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के कार्य के साथ-साथ युवा पीढ़ी में अपनी संस्कृति को लेकर संवेदनशीलता पैदा कर रहा है। विद्यार्थियों ने रत्नावली में अपने उत्पाद बनाकर व उन्हें बेचकर जो अर्जित किया है उससे विद्यार्थी अपनी संस्कृति के साथ-साथ स्वरोजगार के प्रति प्रवृत्त करने का प्रयास भी रत्नावली कार्यक्रम के बीच से निकल रहा है। इस मौके पर कुलसचिव प्रो. संजीव शर्मा, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. शुचिस्मिता, डीवाईसीए प्रो. महासिंह पूनिया, प्रो. ब्रजेश साहनी, प्रॉक्टर प्रो. सुनील ढींगरा, प्रो. अनिल गुप्ता, प्रो. परमेश कुमार, डॉ. दीपक राय बब्बर, डॉ. रामनिवास, डॉ. गुरचरण सिंह, डॉ. जितेन्द्र जांगडा, सहित शिक्षक, कर्मचारी व विद्यार्थी मौजूद रहे।



महाभारत व रामायण महाकाव्य हमारी संस्कृति व सभ्यता के प्रतीक : गजेंद्र चौहान
फिल्म अभिनेता व दादा लख्मीचंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफोर्मिंग एंड विज़यूअल आर्ट्स रोहतक के कुलपति गजेंद्र चौहान ने कहा कि महाभारत व रामायण महाकाव्य हमारी संस्कृति व सभ्यता के बहुत बड़े प्रतीक हैं। यह सिर्फ देखने की नहीं सीखने की चीजें है। हरियाणा की संस्कृति बहुत गूढ़ है। हरियाणा में कलाकारों की कमी नहीं है। हर व्यक्ति अपनी कला में निपुण है। बीबीसी के मुख्य चैनल पर हिंदी में कोई भी प्रोग्राम टेलिकास्ट नहीं होता था, रामायण भी नहीं हुआ, लेकिन महाभारत छह बार टेलिकास्ट हुआ। उन्होंने महाभारत के कई रोचक संवाद भी सुनाए। उन्होंने बताया कि उन्होंने 1200 सीरियल व 450 के करीब फिल्मों में काम किया है।
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