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Kurukshetra News: रत्नावली महोत्सव कल से, दिखेगी हरियाणवी संस्कृति की झलक

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कुरुक्षेत्र। जानकारी देते हुए झोपड़ी बनाने वाले कारीगर नासिर।
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का सबसे बड़ा सांस्कृतिक उत्सव रत्नावली 28 अक्तूबर से शुरू होने जा रहा है जिसमें हरियाणवी पवैलियन आकर्षण का प्रमुख केंद्र होगा। पांच लाख 88 हजार रुपये की लागत से तैयार किए जा रहे इस पवैलियन में 44 पारंपरिक झोपड़ियां बनाई गई हैं, जहां हरियाणवी संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी।
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इन झोपड़ियों पर स्टॉल सजाए जाएंगे, जो हरियाणवी सांग, परिधान और हस्तशिल्प को प्रदर्शित करेंगे। पवैलियन के निर्माण में 300 सफेदा बली, 400 बांस और दो हजार फूस के बंडल का उपयोग किया गया है। इसे तैयार करने वाली तीसरी पीढ़ी के कारीगर नासिर ने बताया कि उनके दादा हाजी हाउद खान और पिता रफीक अहमद भी इस कला में माहिर थे। नासिर ने कहा कि सुरजकुंड मेले से लेकर गीता जयंती तक उनकी बनाई झोपड़ियां आयोजनों की शोभा बढ़ाती रही हैं। रत्नावली के लिए उनकी 12 सदस्यीय टीम ने तीन से चार दिन तक दिन-रात काम कर इस पवैलियन को तैयार किया। नासिर का कहना है कि इस तरह के आयोजनों से उनकी पारंपरिक कला को नया जीवन मिल रहा है।
रत्नावली का यह आयोजन हरियाणवी संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय कारीगरों को भी प्रोत्साहन दे रहा है। पवैलियन में हरियाणवी संस्कृति के रंग, स्वाद और शिल्प की अनूठी छटा देखने को मिलेगी, जो यादगार अनुभव होगा। कुवि के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. महा सिंह पूनिया ने बताया कि यह पवैलियन न केवल सांस्कृतिक विरासत को संजोएगा, बल्कि पर्यटकों और स्थानीय लोगों को हरियाणा की समृद्ध परंपराओं से रूबरू कराएगा।

कुरुक्षेत्र। जानकारी देते हुए झोपड़ी बनाने वाले कारीगर नासिर।

कुरुक्षेत्र। जानकारी देते हुए झोपड़ी बनाने वाले कारीगर नासिर।

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