प्याज का स्टाक करने वालों पर अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो अगस्त तक ग्राहकों के आंसू निकाल सकता है। एक ओर केंद्र सरकार प्याज सहित अन्य वस्तुओं की कालाबाजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने का दावा कर रही है।
वहीं कुरुक्षेत्र के पड़ोसी जिलों में प्याज का बड़े पैमाने पर स्टाक हो चुका है। कुरुक्षेत्र सब्जी मंडी के कुछे व्यापारियों की मानें तो पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार प्याज के दाम अभी उस स्तर तक नहीं पहुंचे जो पिछले वर्षों में थे।
कुरुक्षेत्र सब्जी मंडी के दो व्यापारियों ने खुलासा किया कि हरियाणा में इस समय अन्य इलाकों के अलावा प्याज स्टाक जोन करनाल के घरौंडा और रंभा गांव बने हैं।
इन दोनों में भी सबसे ज्यादा प्याज करनाल के गांव रंभा में स्टाक हो चुका है। इन व्यापारियों ने ये भी बताया कि मौसम के मिजाज के चलते स्टाक किए प्याज पर भी खतरा मंडराने लगा है।
लिहाजा जमाखोर में इसी डर से थोड़ा-थोड़ा स्टाक मार्केट के जरिये निकाल रहे हैं ताकि मुनाफे के चक्कर में नुकसान न झेलना पड़े।
एक दिन पहले लोकल प्याज मंडी तक बड़ी मात्रा में पहुंचा। गौर करने वाली बात है कि इस बार अभी तक मंडी में नासिक, गुजरात और राजस्थान के प्याज की डिमांड न के बराबर है। लोकल प्याज मार्केट में जबरदस्त पकड़ बनाए है।
उल्लेखनीय है कि कुरुक्षेत्र की खुदरा मार्केट में प्याज अभी 25 से 30 रुपये प्रति किलो बिक रहा है लेकिन 12 जुलाई को कुरुक्षेत्र की मंडी में 15 से 16 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से प्याज बिक चुका है।
वर्ष 2013 जुलाई और वर्ष 2014 जुलाई के दिनों में ये सबसे कम दाम रहे। शनिवार को प्याज के इन कम दामों के बावजूद खुदरा मार्केट में प्याज वही 25 से 30 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिक रहा है। अधिकारियों का मौन ग्राहकों की जेबों पर भारी पड़ रहा है। वहीं अगले दिनों में और भी भारी पड़ सकता है।
कुरुक्षेत्र मंडी आता है प्याज, टमाटर व आलू
कुरुक्षेत्र की सब्जी में अमूमन प्याज, टमाटर और आलू लोकल उत्पादकों और दूसरे प्रांतों से पहुंचता है। इनमें लोकल के अलावा टमाटर शिमला, नासिक (महाराष्ट्र) से आता है।
वहीं प्याज नासिक (महाराष्ट्र), राजस्थान, गुजरात से पहुंचता है। इसी तरह आलू आगरा और शिमला (पहाड़ी आलू) पहुंचता है। इनके अलावा अगस्त में कर्नाटक का लाल आलू भी कुरुक्षेत्र मंडी में पहुंचेगा।
जमाखोरी रुके तो प्याज 12 रुपये किलो
कुरुक्षेत्र सब्जी मंडी के व्यापारियों के मुताबिक लोकल प्याज की ताजा खपत के मुकाबले उत्पादन काफी अधिक है। जमाखोरी के कारण प्याज के दाम चढ़ गए हैं।
इनका कहना है कि अगर प्याज का स्टाक न हो तो तो इसके वर्तमान दाम 12 से 16 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक नहीं हो सकते।
बांस के टंडरों में स्टाक हो रहा है प्याज
प्याज को हवा लगती रहे इसलिए प्याज गोदामों की बजाय बांस से बनाए टंडरों में बड़े पैमाने पर स्टाक किया गया है। पिछले कुछ दिनों से मौसम में उम्मीद से अधिक गर्मी है।
इसके चलते स्टाक किए प्याज के खराब होने के आसार हैं। इसलिए जमाखोरों ने स्टाक किए प्याज को निकालना शुरू कर दिया है लेकिन जमाखोरी के अनुकूल वातावरण में प्याज का स्टाक बढ़ सकता है। इस कारण अगस्त-सितंबर में प्याज के दाम बढ़ सकते हैं।
खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी करेंगे कार्रवाई
जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी रविंद्र सिंह मलिक ने अमर उजाला की सूचना पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि जब तक उपभोक्ता जागरूक नहीं होंगे, तब तक खुदरा में उनकी जेब कटती रहेगी।
मलिक के मुताबिक ग्राहक को मंडी के थोक रेट की जानकारी होना लाजिमी है। वहीं उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा मार्केट की मॉनिटरिंग कराई जाएगी ताकि थोक और खुदरा के बीच का अंतर हो सके और उन लोगों पर कार्रवाई भी हो सके जो मनमाने दाम वसूल कर रहे हैं।
सरकार बताए तो सही कितना स्टाक कर सकते हैं
जमाखोरी को रोकने के लिए अभी तक राज्य सरकार की ओर से ऐसा कोई आदेश नहीं है कि कोई व्यक्ति कितना स्टाक अपने पास रख सकता है।
इसी असमंजस में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग अभी तक कार्रवाई करने में लाचार है। अधिकारियों का कहना है कि कोई व्यापारी या उत्पादक अपने पास कितनी मात्रा में स्टाक रख सकता है, सरकार ने यह अभी तक स्पष्ट नहीं किया है।
एक्सपर्ट व्यू
दुनिया में 10 प्रतिशत का प्याज का उत्पादन भारत में
अक्तूबर तक ही टिक सकता है स्टाक : डॉ. सिंह
प्रख्यात कृषि विशेषज्ञ डॉ. सीबी सिंह के मुताबिक दुनियाभर मे होने वाले प्याज उत्पादन में भारत 10 प्रतिशत फसल पैदा करने वाला उत्पादक देश है।
बावजूद इसके जमाखोरी के कारण अक्सर प्याज को लेकर हाहाकार मचता है। डॉ. सिंह का कहना है कि जमाखोरों को अक्तूबर के पहले सप्ताह से पहले ही स्टाक निकालना पड़ेगा,क्योंकि इसके बाद मौसम की मार उनके स्टाक को खराब कर सकती है।