कुरुक्षेत्र। श्री रामलीला ड्रामाटिक क्लब की ओर से पुराने बस स्टैंड के नजदीक शहीद मदन लाल ढींगड़ा पार्क में दूसरे दिन राजा दशरथ का पुत्रेष्टि यज्ञ करवाना, ताड़क वन में राक्षसों की खरमस्तियां और ताड़का राक्षसी वध इत्यादि प्रसंगों का मंचन किया गया।
श्रवण कुमार सीए ने बतौर मुख्यातिथि श्रीराम आरती में हिस्सा लिया। चेयरमैन डॉ. महेश तनेजा और प्रधान जितेंद्र ललित ने बताया कि रामलीला का मुख्य प्रसंग ताड़का वध रहा, जिसे दर्शकों ने उत्सुकतापूर्वक देखा। ताड़का रामायण की मुख्य पात्र है, यह सुकेतु यक्ष की पुत्री थी जिसका विवाह सुड़ नामक राक्षस के साथ हुआ था। यह अयोध्या के समीप स्थित सुंदर वन में अपने पति और दो पुत्रों सुबाहु और मारीच के साथ रहती थी। उसके शरीर में हजार हाथियों का बल था। उसके प्रकोप से सुंदर वन का नाम ताड़का वन पड़ गया था। उसी वन में विश्वामित्र सहित अनेक ऋषि-मुनि भी रहते थे।
उनके जप, तप और यज्ञ में ये राक्षस हमेशा बाधाएं खड़ी करते थे। विश्वामित्र राजा दशरथ से अनुरोध कर राम और लक्ष्मण को अपने साथ सुंदर वन लाए। राम ने ताड़का का और विश्वामित्र के यज्ञ की पूर्णाहुति के दिन सुबाहु का वध किया। मारीच उनके बाण से आहत होकर दूर दक्षिण में समुद्र तट पर जा गिरा।
कोषाध्यक्ष एवं निर्देशक राजेंद्र गाबा ने बताया कि रामलीला मंचन में रमेश सडाना ने राजा दशरथ, दीपक चोपड़ा ने वशिष्ठ ऋषि, बृजलाल सोहेल ने श्रृंगी ऋषि, सतीश शर्मा ने विश्वामित्र, मोंटी मेहरा ने ताड़का, सुरेश तनेजा ने मारीच, विनय शर्मा ने सुबाहु, राहुल ने सुमंत्र मंत्री, पीयूष गाबा ने राम, वंश ने लक्ष्मण, सुरेश तनेजा ने मारीच, विनय शर्मा ने सुबाहु, रंजीत, सक्षम, अभिषेक, हार्दिक गाबा, रविंद्र धीमान, प्रदीप और विक्की ने क्रमशः राजा दशरथ के दरबारियों, ऋषियों और राक्षसों की सेना के किरदार निभाए।
कुरुक्षेत्र। रामलीला का मंचन करते कलाकार। विज्ञप्ति