कुरुक्षेत्र। भारतीय संस्कृति में राखी का त्योहार बहुत महत्व रखता है, जो कि भाई-बहन के बीच प्यार, स्नेह और बंधन का प्रतीक होता है। इस दिन की शुरुआत बहनों और भाइयों द्वारा पारंपरिक पोशाक पहनकर की जाती है। बहनें राखी, रोली, चावल के दाने, मिठाई और दीपक के साथ एक थाली तैयार करती हैं और भाई के आने पर, उनके माथे पर तिलक लगाती हैं। साथ स्नेह भरी राखी भी बांधती हैं। भाई भी बदले में बहन की रक्षा करने का वादा करता है और उन्हें प्यार स्वरूप उपहार देता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित रामराज कौशिक ने बताया कि राखी सुरक्षा, देखभाल और सम्मान के सार्वभौमिक मूल्यों का प्रतिनिधित्व करती है, जो कि परिवार की सीमाओं से आगे बढ़कर पूरे समाज के कल्याण को शामिल करती है। यह एक दूसरे के प्रति हमारी जिम्मेदारियों की याद दिलाती हैं जो कि करुणा और एकजुटता की भावना को भी बढ़ावा देती है।
भद्रा रहित समय में करें रक्षाबंधन
19 अगस्त को रक्षा बंधन भद्रा मुख 10 बजकर 53 मिनट से दोपहर 12 बजकर 37 मिनट तक है जो कि अशुभ समय है। इस समय को छोड़कर पूरा दिन किसी भी समय रक्षाबंधन मनाया जा सकता है। रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। अपराह्न का समय रक्षाबंधन के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है, जो कि हिंदू समय गणना के अनुसार दोपहर के बाद का आता है। यदि अपराह्न का समय भद्रा की वजह से उपयुक्त नहीं है तो प्रदोष काल का समय भी रक्षाबंधन के लिए उपयुक्त माना जाता है।
राखी बांधने का शुभ मुहूर्त
- सुबह नौ बजकर 51 मिनट से 10 बजकर 53 मिनट तक
- दोपहर एक बजकर 30 मिनट से रात नौ बजकर आठ मिनट तक
- अपराह्न का मुहूर्त एक बजकर 43 मिनट से शाम चार बजकर 20 मिनट तक
- प्रदोष काल का मुहूर्त शाम छह बजकर 56 मिनट से रात्रि नौ बजकर आठ मिनट तक