कुरुक्षेत्र। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में प्रवचन सुनती हुई ब्रह्मकुमारी बह
कुरुक्षेत्र। आत्मा का परमात्मा से मिलन ही राजयोग बताया गया है। आत्माओं को पावन बनाने और राजयोग की शिक्षा देने स्वयं परमात्मा इस धरा पर अवतरित होते हैं। परमात्मा का अवतरण होता है न कि जन्म लेते हैं। इसीलिए उनको परमपिता कहते हैं।
यह प्रवचन प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सेवा केंद्र की इंचार्ज बीके सरोज बहन ने दिए। उन्होंने बताया कि राजयोग सभी योगों का राजा है। स्वयं परमात्मा शिव अपना सत्य परिचय देकर आत्मा को अपने साथ योग लगाने की विधि बताते हैं। राजयोग मेडिटेशन से मन ही नहीं, शरीर भी स्वस्थ रहता है। इसमें जीवन की हर समस्या का हल समाया हुआ है। राजयोग के अभ्यास द्वारा हमारी विलुप्त शक्तियां जागृत हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि गीता के नौवें अध्याय के आरंभ में ही कहा गया है कि भगवान द्वारा सिखाया गया योग राजयोग है। इस अवसर पर डाॅ. बीके प्रवीण महाजन, संतोष शर्मा, सुदेश दीगड़ा, राज कुमारी, ममता दुआ और बीके सतीश कत्याल, प्रो. सुरेश चंद्र,हरबंस सिंह औजला आदि मौजूद थे।