कुरुक्षेत्र। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जब बोलते हैं तो उनकी आवाज से पाकिस्तान की नींद उड़ जाती है। परिवहन मंत्री अनिल विज ने अंतरराष्ट्रीय गीता सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर जब यह कहा तो कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का ऑडिटोरियम तालियों से गूंज उठा और पूरा माहौल जोश व उत्साह से भर गया।
उन्होंने कहा कि कर्मयोग निस्वार्थ रूप से किया गया कार्य होता है। गीता में हर प्रश्न का उत्तर दिया हुआ है। भगवान श्रीकृष्ण ने हर प्रकार के हालात के लिए यह संदेश दिया है। गीता में हर समस्या का समाधान है और जीवन की सही राह भी।
इस दौरान कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी ने रक्षा मंत्री व अन्य अतिथियों का प्रदेश सरकार की ओर से आभार जताया और गीता की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। वहीं स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संगठक व प्रसिद्ध आर्थिक विशेषज्ञ श्री सतीश ने सम्मेलन की प्रस्तावना प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि अपने धर्म, कर्तव्य में जीना श्रेयस्कर है। परधर्म में जीना विनाश का कारण है। जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी प्यारी होती है। स्वदेशी का व्यापक अर्थ स्वभाषा, स्वभूषा, स्वधर्म, स्वकर्तव्य, स्वबोध है। जो स्व में स्थित है वो स्वस्थ है इसलिए भारत को स्व में स्थिर रहना है, स्वस्थ रहना है और स्वदेशी में आना है।
हमें गीता के कर्मयोग का करना चाहिए पालन : ज्ञानानंद
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि गीता हमें स्वधर्म से पलायन न करने की शिक्षा देती है। भगवान कृष्ण ने अर्जुन को स्वधर्म का संदेश दिया था। भारत की नीति कभी युद्ध की नहीं रही है। गीता के कर्मयोग का हमें पालन करना चाहिए। स्वधर्म केवल मजहब की स्थिति नहीं है। धर्म उदारता, खुलेमन का नाम है। गीता सभी की है। गीता का प्रारंभ धर्म से होता है। मानवता हमें गीता सिखाती है। गीता का स्वधर्म वैश्विक प्रेरणा है। पूरे विश्व को शांति और सद्भाव के लिए गीता का अनुसरण करना चाहिए।
इस दौरान कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने सम्मेलन के उद्देश्य, महत्व और गीता संदेश की वैश्विक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
महोत्सव में पूर्व राज्य मंत्री सुभाष सुधा, जय भगवान शर्मा डीडी, मलयेशिया से संत स्वामी संत प्रकाशानंद महाराज, कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा, कुलसचिव डॉ. वीरेंद्र पाल, केडीबी मानद सचिव उपेंद्र सिंघल, सीईओ पंकज सेतिया, एनआईटी के निदेशक डॉ. बीवी रमन्ना रेड्डी सहित अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद रहे।