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राहुल गांधी: बताया क्यों लिया केवल टी-शर्ट पहनने का फैसला, बोले- महात्मा गांधी बनना नहीं, संदेश देना चाहता हूं

Mon, 09 Jan 2023 11:24 PM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, अंबाला/शाहाबाद (हरियाणा)

सार

टी-शर्ट को लेकर लगातार विरोधियों के निशान पर चल रहे राहुल गांधी ने आखिरकार इस बात का खुलासा कर दिया है कि वे इतनी सर्दी में भी टी-शर्ट क्यों पहने हुए हैं। उन्होंने इसको लेकर कहा कि ऐसा करके मैं महात्मा गांधी नहीं बनना चाहता, बल्कि उन बच्चों को संदेश देना चाहता हूं। 
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भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गांधी को तिलक करने के लिए पहुंची रोहतक व भिवानी की महिलाएं। - फोटो : भारत भूषण शर्मा।
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विस्तार
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हरियाणा में भारत जोड़ो यात्रा के दूसरे चरण में सोमवार को राहुल गांधी ने कुरुक्षेत्र से अंबाला तक पदयात्रा की। महाभारत की धरती से उन्होंने एक बार फिर कांग्रेसियों को तपस्वी बताया। अपनी टी-शर्ट को लेकर लगातार विरोधियों के निशान पर चल रहे राहुल गांधी ने आखिरकार इस बात का खुलासा कर दिया है कि वे इतनी सर्दी में भी टी-शर्ट क्यों पहने हुए हैं। राहुल ने बताया कि उन्होंने अपनी यात्रा जब केरल से शुरू की थी, तो वहां बहुत गर्मी थी। यात्रा के दौरान ऐसा लगता था कि टी-शर्ट उतार दी जाए। जब मध्य प्रदेश पहुंचे तो मौसम में ठंडक महसूस होने लगी।

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उन्होंने कहा कि एक सुबह जब हमने यात्रा शुरू की तो काफी ठंड महसूस हो रही थी। यात्रा में उनसे मिलने के लिए दो छोटी बच्चियां खड़ी थीं। बच्चियों को जब फोटो खिंचवाने के लिए पास बुलाया तो वे ठंड से कांप रही थीं और उनके तन पर बहुत पतले कपड़े थे।

बस, तभी उन्होंने फैसला कर लिया था कि जब तक ठंड उन्हें नहीं कंपकंपाएगी तब तक वे टी-शर्ट में ही रहेंगे। जब बहुत ज्यादा कठिनाई होगी, तभी वे स्वेटर पहनने के बारे में सोचेंगे। राहुल ने कहा कि ऐसा करके मैं महात्मा गांधी नहीं बनना चाहता, बल्कि उन बच्चों को संदेश देना चाहता हूं कि उनका दर्द मैंने महसूस किया है।
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किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों को बताया तपस्वी
पांडवों का उदाहरण देते हुए राहुल ने कहा कि पांडव तपस्वी थे, इसलिए उस वक्त कोई अरबपति उनके साथ नहीं खड़ा था। उन्होंने अपना समय जंगलों में बिताया, उसके बाद हर वर्ग के लोग उनके साथ जुड़ते चले गए और उन तपस्वियों ने फिर अन्याय और अधर्म के विरुद्ध युद्ध किया और जीता।

राहुल ने कहा कि आज भी एक महाभारत चल रही है, जिसमें किसान, मजदूर और छोटे व्यापारी तपस्वी हैं और इन तपस्वियों के साथ कांग्रेस खड़ी है। गीता में भी यही संदेश दिया गया है कि तपस्वी को केवल कर्म करना चाहिए, उसके फल की इच्छा नहीं।

इसलिए हम चाहते हैं कि सरकार देश के असली तपस्वियों यानी किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों की मदद करे, उनकी रक्षा करे और हमारी भारत जोड़ो यात्रा का मकसद भी यही है कि तपस्वियों की तपस्या व्यर्थ न जाए। जिस दिन किसानों, मजदूरों व छोटे व्यापारियों को तपस्या का फल मिल जाएगा, उस दिन देश का मुकाबला दुनिया में कोई नहीं कर पाएगा।

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