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शिक्षा के स्तर में गुणात्मक सुधार को रहा मंथन : डीसी

Wed, 16 Sep 2015 12:47 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला कुरुक्षेत्र
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उपायुक्त सीजी रजिनिकांतन ने कहा कि शिक्षा के स्तर में गुणात्मक सुधार लाने के लिए ही राज्य सरकार नई शिक्षा नीति को लेकर शिक्षाविदों के साथ मंथन कर रही है।
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सभी जिलों में किए जा रहे मंथन और मिलने वाले सुझावों के आधार पर ही राज्य सरकार नई शिक्षा नीति तैयार करेगी। वे मंगलवार को लघु सचिवालय के सभागार में नई शिक्षा नीति को लेकर जिला शिक्षा विभाग की तरफ से आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे।

उपायुक्त ने कहा कि नई शिक्षा नीति को लेकर सभी अपने सुझाव दें। इनमें व्यवहारिक अनुभव को भी शामिल किया जाए। सभी प्रथम कक्षा से ही बच्चों को अच्दी शिक्षा देने के लिए बेहतर सुझाव दें। इससे विद्यार्थी का आधार मजबूत होगा।
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सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. आरबी लांग्यान ने कहा कि कक्षा का एक टीचर होना चाहिए और शिक्षकों को अच्छे तरीके से शिक्षा देनी चाहिए। स्टाफ की कमी को भी पूरा करा जाए।

प्रो. हिम्मत सिंह सिन्हा ने कहा कि सरकार पॉलिसी बदलने, उसमें सुधार की जरूरत और क्या सुधार लाना है, इसे स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में कमिटमेंट टू सब्जेक्ट, कमिटमेंट टू प्रोजिनी, कमिटमेंट टू नेशन शामिल करने चाहिए।

अच्छे टीचर बनाने का प्रयास करना चाहिए। शिक्षा अधिकारी डॉ. अरुण आश्री ने कहा कि स्कूलों में स्टूडेंट डायरी, टीचर डायरी और प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर अभिभावक-शिक्षक मीटिंग, बालिका मंच, अक्षर ज्ञान पर फोकस रखने की जरूरत है।

शिक्षा अधिकारी नमिता कौशिक ने कहा कि कि पेरेंट्स-टीचर मीटिंग और वार्षिक उत्सवों का आयोजन स्कूल में किया जाए। इस मीटिंग का संचालन राजकीय स्कूल सुष्मा ने किया। उन्होंने नई शिक्षा नीति के लिए 13 मुख्य बिंदुओं पर सुझाव मांगे।

इस मौके पर सीटीएम डॉ. पूजा भारती, जिला शिक्षा अधिकारी परविंद्र कौर, संयोजकों में जसविंद्र सिंह कनीपलां आदि मौजूद थे।

शिक्षकों ने दिए ये सुझाव
राजकीय स्कूल कनीपलां की शिक्षिका सविता ने कहा कि राजकीय स्कूल कनीपलां में साइंस लैब की हालत खस्ता है। शायद ऐसे ही हालात हर स्कूल में हैं। गांवों के स्कूलों में लाइट न होने से कंप्यूटर नहीं चलते और लैब में भी काम नहीं हो पाता।

कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर भी अपडेट नहीं हैं। इस वजह से विद्यार्थी भी उनका लाभ नहीं उठा पाते। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रैक्टिल करवाने के लिए अपनी जेब से तीन हजार रुपये खर्च कर साइंस लैब के लिए सामान खरीदा है।

कक्षाओं में साइंस और मैथ के पीरियड केवल 5 या 6 रखे गए हैं, जबकि इतिहास और आर्ट्स विषयों के पीरियड 8 से 10 हैं। ऐसे में शिक्षक साइंस के विद्यार्थियों को किस प्रकार अधिक पढ़ा सकते हैं। इस्माईलाबाद के शिक्षक राजेंद्र ने कहा कि लगातार मूल्यांकन प्रणाली फर्जीवाड़ा लग रही है।

मंथली टेस्ट से कोई सुधार होने वाला नहीं है। इसलिए इस विषय पर गौर करना चाहिए।

स्कूलों के लिए हो एक जैसी नीति : गोयल
गीता निकेतन आवासीय स्कूल के प्रिंसिपल डॉ. ऋषि गोयल ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत राजकीय स्कूलों और निजी स्कूलों के लिए एक जैसी पॉलिसी बनानी चाहिए।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार राजकीय स्कूलों में एक बच्चे पर 28 हजार रुपये खर्च हो रहे हैं। निजी स्कूलों के लिए भी सरकार को इस खर्चे का आंकलन करना चाहिए। इसके बाद ही निजी स्कूलों को बच्चों की फीस निर्धारित करने की अनुमति दी जाए।
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सरकार को शिक्षकों के ट्रांसफर और पोस्टिंग के लिए भी पारदर्शी प्रणाली अपनानी चाहिए।
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