शाहाबाद। अनाज मंडी में हजारों पल्लेदार प्रति कट्टा मजदूरी रेट 38 रुपये तय करने की मांग को लेकर शुक्रवार को हड़ताल पर उतर आए, जिससे चार घंटे तक सूरजमुखी की तुलाई बंद रही। बाद में आढ़तियों द्वारा भरोसा दिया गया तो पल्लेदार शांत हुए, जिसके उपरांत सूरजमुखी की तुलाई, भराई आदि सामान्य हो पाई।
हालांकि मार्केटिंग बोर्ड की तरफ से मौजूदा रेट पल्लेदारों की तरफ से 8.29 पैसे तय किया गया है। ठेकेदार अपनी मांग मनवाने को लेकर शेड के नीचे बैठे रहे। पल्लेदारों का नेतृत्व करते हुए ठेकेदार दीपक, बरमा, संजय व अमित ने कहा कि बदन झुलसाती गर्मी के अंदर पल्लेदार कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन उनके काम के अनुसार उन्हें मजदूरी नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि मार्केटिंग बोर्ड की तरफ से मात्र आठ रुपये 29 पैसे का रेट तय किया गया है और इस रेट पर वह काम नहीं करेंगे। यहां तक कि अनाज मंडी को छोड़कर चले जाएंगे। उन्होंने कहा कि मार्केटिंग बोर्ड की तरफ से पहले तय किये गये रेट में बढ़ोत्तरी की गई थी, लेकिन बाद में इसे कम कर दिया गया। पल्लेदारों ने मांग की है कि बोरी कसने के पांच रुपये, पंखा, झरना, झाडू आदि के छह रुपये, भराई और तुलार्ई के आठ रुपये, सिलाई एक रुपया, लदाई व डांग तीन रुपये व सुखाई के 15 रुपये मिलाकर 38 रुपये प्रति कट्टा तय किया हुआ है। एक अनुमान के मुताबिक सूरजमुखी के सीजन में 28 केजी के करीब सात से आठ लाख कट्टों की भराई, तुलार्ई व सिलाई होगी। उधर, पल्लेदारों की हड़ताल के दौरान किसान खुद सूरजमुखी सुखाते दिखाई दिए।
मंडी प्रधानों ने दिया भरोसा
मंडी में पल्लेदारों की हड़ताल के कारण आढ़ती व किसान परेशान होने लगे, जिस पर आढ़तियों की बैठक प्रधान स्वर्णजीत सिंह कालड़ा व प्रधान धनपत राय अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई। इसमें आढ़तियों ने पल्लेदारों के ठेकेदारों के साथ बैठक क। करीब एक घंटे की बैठक के बाद प्रधान स्वर्णजीत सिंह कालड़ा और प्रधान धनपत राय अग्रवाल ने पल्लेदारों को शांत किया और आश्वासन दिया कि उन्हें प्रति कट्टा उचित रेट मिलेगा, ताकि उनको उनकी मजदूरी का उचित मेहनताना मिल सके। आढ़तियों के आश्वासन पर पल्लेदार शांत हुए और दोपहर करीब एक बजे काम पर लौट आए।
फसल खराब न हो इसलिए रेट बढ़ाकर देना मजबूरी
मंडी प्रधान स्वर्णजीत सिंह कालड़ा व प्रधान धनपत राय अग्रवाल ने कहा कि हजारों रुपये क्विंटल की फसल खुले में पड़ी है। ऐसे में फसल की संभाल करना आढ़तियों के लिए जरूरी है। मार्केटिंग बोर्ड की तरफ से तय किये गये रेट इतने कम होते हैं कि पल्लेदार काम नहीं करते हैं इसलिए तय रेट से बढ़ाकर देना आढ़तियों की मजबूरी बन जाता है। इसलिए आढ़तियों ने अपने हिसाब से तय रेट में कुछ बढ़ोत्तरी की है जिसके बाद पल्लेदार काम पर लौट आए हैं।