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प्रधान-उपप्रधान पद के नतीजों के लिए 3 अगस्त तक बढ़ा इंतजार

Fri, 29 Jul 2016 12:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरूक्षेत्र
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चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय - फोटो : file photo
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लाडवा नगरपालिका के प्रधान और उपप्रधान पद के नतीजे के लिए उच्च न्यायालय ने दोनों पदों के प्रत्याशियों, पार्षदों एवं कस्बावासियों का इंतजार एक सप्ताह तक बढ़ा दिया है, लेकिन चुनाव अधिकारी को पार्षदों के वोटों की गिनती के लिए भी निर्देश दिए हैं। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने वीरवार को पालिका के प्रधान और उपप्रधान पदों के चुनाव में सांसद एवं विधायक के वोट डालने के मामले की सुनवाई के दौरान इस मामले में अब 3 अगस्त की तारीख दे दी है। मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पार्षद सुमित बंसल तथा पूर्व पालिका प्रधान मनदीप सिंह तूर एवं दूसरे पक्ष से लाडवा के वार्ड दस की पार्षद एवं प्रधान पद की प्रत्याशी साक्षी खुराना के पति अमित खुराना उच्च न्यायालय में पेश हुए।
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मामले की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने चुनाव अधिकारी को निर्देश दिए कि वे चाहें तो पार्षदों की मौजूदगी में उनके वोटों की गिनती कर सकते हैं, लेकिन यदि याचिकाकर्ता के सामने वाले पक्ष की जीत का अंतर दो वोट से अधिक हो तो ही चुनाव परिणाम घोषित किया जाए। उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार जीत का अंतर एक वोट का होने पर नतीजा घोषित न करके उसे मतों के साथ ही 3 अगस्त को उच्च न्यायालय में पेश किया जाएगा। याचिकाकर्ता के सामने वाला पक्ष भाजपा समर्थित प्रधान पद की प्रत्याशी पार्षद साक्षी खुराना का है।

इस संबंध में उच्च न्यायालय में याचिका डालने वाले नगर पालिका के पूर्व प्रधान मनदीप सिंह तथा पार्षद सुमित बंसल के अधिवक्ता रविंद्र बांगड़ के अनुसार न्यायालय ने कहा है कि पार्षदों के मतों की गिनती में भाजपा समर्थित प्रत्याशी की जीत का अंतर दो से अधिक रहता है तो वैसे ही भाजपा समर्थित प्रत्याशी की जीत तय है, इसलिए उसका परिणाम वहीं घोषित करने में कोई हर्ज नहीं, लेकिन यदि भाजपा समर्थित प्रत्याशी की जीत का अंतर दो या इससे कम मतों का है तो परिणाम घोषित न किया जाए, बल्कि इसको 3 अगस्त को उच्च न्यायालय में पेश किया जाए। कोर्ट तय करेगा कि ऐसे हालात में सांसद एवं विधायक के वोट डलने चाहिए या नहीं।
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इससे पहले उच्च न्यायालय में दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपना-अपना पक्ष रखा। उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता रविंद्र बांगड़ ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि जिस दिन मामले की सुनवाई होगी, उस दिन उच्च न्यायालय का फैसला उनके मुवक्किलों के ही पक्ष में आएगा।
उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के फैसले का सीधा असर लाडवा ही बल्कि उन सभी नपा पर पड़ेगा, जहां अभी तक प्रधान और उपप्रधान पद के चुनाव नहीं हुए हैं।

सांसद और विधायक की प्रतिष्ठा दांव पर
लाडवा नपा के प्रधान पद के चुनाव में सांसद राजुकमार सैनी और हलका थानेसर विधायक के नजदीकी पार्षद का उपप्रधान बनना तय माना जा रहा है। सुभाष सुधा के नजदीकी पार्षद अनिल माटा का नाम प्रधान पद के लिए गैर भाजपा खेमे ने रखा और अनुमोदन किया, जबकि भाजपा खेमे के पार्षदों ने भी अनिल माटा को वोट दिए बताए जाते हैं। उच्च न्यायालय द्वारा अगली तारीख लगाए जाने और मतों की गिनती कराए जाने के निर्देश के बाद जहां प्रधान एवं उपप्रधान पद के प्रत्याशियों की धड़कनें बढ़ गई हैं। प्रधान पद पर हार-जीत को लेकर लाखों रुपये की शर्तें भी लग चुकी हैं।

इसलिए उच्च न्यायालय में है मामला
लाडवा नपा के पूर्व प्रधान मनदीप सिंह और वार्ड-12 के पार्षद सुमित बंसल शालू ने 30 जून 2016 को उच्च न्यायालय में याचिका दी थी। याचिका में कहा गया था कि सरकार द्वारा सांसद और विधायक को नपा का सदस्य मनोनीत किया जाता है, जो नपा की बैठकों में भाग ले सकतेे हैं। लेकिन, इन मनोनीत सदस्यों को प्रधान और उपप्रधान के चुनाव में वोट डालने का अधिकार नहीं है।

ऐसे में क्या सांसद एवं विधायक को लाडवा नपा के प्रधान और उपप्रधान के चुनाव में वोट डालने का अधिकार है। इस याचिका पर उच्च न्यायालय ने 4 जुलाई को तय प्रधान और उपप्रधान के चुनाव में पार्षदों की वोट अलग, सांसद और विधायक की वोट अलग डलवाकर तथा सील कराकर 5 जुलाई को अपने पास पहुंचाने के आदेश दिए थे। पांच जुलाई को वकीलों की हड़ताल के चलते उच्च न्यायालय ने 18 जुलाई की तारीख दी थी और 18 जुलाई को भी वकीलों की हड़ताल के चलते सुनवाई 28 जुलाई तक टल गई थी। अब वीरवार को सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने 3 अगस्त को अगली सुनवाई के लिए तारीख दी  है।
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