राष्ट्रपति ने अर्पित किए चांदी के अश्व
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद राष्ट्रपति ने प्राचीन परंपरा के अनुसार श्री देवीकूप में मां सती का पूजन किया। परिक्रमा करने के बाद उन्होंने चांदी के अश्व मां के चरणों में समर्पित किए। इसके पश्चात मंदिर के गर्भगृह में पहुंचकर स्वर्ण-रजत पोशाक से सुसज्जित मां भद्रकाली के दर्शन किए और विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। उन्होंने मां के पवित्र चांदी के चरणों का पंचामृत से अभिषेक किया और श्रद्धापूर्वक आरती की।
पीठाध्यक्ष ने राष्ट्रपति को माताओं को समर्पित महागौरव स्थल के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रपति ने मंदिर समिति के सदस्यों के साथ सामूहिक फोटो खिंचवाया। इस दौरान राष्ट्रपति ने मंदिर समिति के सदस्यों की सराहना करते हुए कहा कि आप सभी बहुत भाग्यशाली हैं कि आपको मां के चरणों में सेवा करने का अवसर मिला है।
राष्ट्रपति के साथ हरियाणा के राज्यपाल असीम घोष और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी मौजूद रहे। इस मौके पर मंदिर समिति के अध्यक्ष नरेंद्र वालिया, उपाध्यक्ष डॉ. एमके मौदगिल, डॉ. संजय शर्मा, स्नेहिल शर्मा, अन्नू पॉल, निकुंज शर्मा, मीना जोशी, सचिन गर्ग और पर्जन्य गौड़ सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
राष्ट्रपति के आगमन पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में हरियाणवी संस्कृति के महोत्सव रत्नावली का शुभारंभ हुआ। महोत्सव को देखने के लिए दूर-दराज के ग्रामीणों, बुजुर्ग महिलाओं और विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों सहित अन्य लोगों का पहुंचना शुरू हो गया है। परिसर में हरियाणवी लोक संस्कृति से जुड़ी प्रस्तुतियों, लोकनृत्यों और सांस्कृतिक प्रदर्शनी के माध्यम से प्रदेश की परंपराओं की झलक देखने को मिल रही है।
रत्नावली में हरियाणा की पारंपरिक कला, लोकनृत्य और सांस्कृतिक विरासत को मंच दिया जा रहा है। महोत्सव के दौरान अलग-अलग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिये कलाकार प्रदेश की लोक परंपराओं को जीवंत कर रहे हैं। वहीं, सांस्कृतिक प्रदर्शनी में भी हरियाणा की विरासत और परंपराओं से जुड़ी चीजें लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं।