इस्माईलाबाद। आलू के दामों में भारी गिरावट आने से किसानों में मायूसी छाई हुई है। इस समय अनाज मंडी में आलू की आवक जोरों पर है। मंडी में आलू 50 से 150 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बिक रहा है, जबकि किसानों के मुताबिक प्रति किलोग्राम नौ रुपये लागत आई है। ऐसे में इस वर्ष आलू की फसल किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हुई है। किसान विष्णु दत्त, राम रत्न, मनदीप, बूटा सिंह ने कहा कि आलू के दाम दिन प्रतिदिन गिरते जा रहे हैं।
आलम यह है कि मार्केट में आलू के जो भाव मिल रहा है, उससे मंडी खर्च भी पूरा नहीं हो रहा। फसल उत्पादन सहित अन्य खर्च तो दूर की बात है। किसानों ने कहा कि मंडी में आलू के दाम गिरने से पुरानी कहावत सही साबित हो रही है कि ताखड़ी न बट्टा सौ रुपये का कट्टा। किसानों ने कहा कि आलू का उत्पादन करने पर नौ रुपये प्रति क्विंटल खर्च आता है। सरकार पिछले कई वर्षों से छह रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से भावांतर के रुपये किसानों के खातों में भेज रही है। किसानों ने सरकार से मांग की है कि भावांतर छह रुपये से बढ़ाकर लागत खर्च से अधिक किया जाए ताकि किसान के नुकसान की भरपाई हो सके। किसानों की मानें तो मंडी में आलू की छंटाई, भराई का खर्च भी किसानों को अपनी जेब से देना पड़ रहा है। ऐसे में भावांतर के पैसे भी ऊंट के मुंह में जीरा का काम है। सरकार भावांतर छह रुपये बढ़ाकर 10 रुपये करे ताकि किसानों का उत्पादन खर्च तो पूरा हो सके।
बंपर पैदावार, आवक तेज, गुणवत्ता में कमी : खरीदार
आलू के खरीदार विकास मेहता, राम कृष्ण, पन्ना लाल आदि ने बताया कि इस वर्ष आलू की बंपर पैदावार है। जबकि आलू की गुणवत्ता में भी कमी है। बंपर आवक और गुणवत्ता में कमी के चलते आलू के दामों में गिरावट है।
हर मदद के लिए तैयार : सचिव
मार्केट कमेटी सचिव अंकुर ठकराल का कहना है कि सरकार किसानों की हर तरह से मदद के लिए तैयार हैं। आलू के कम दामों की भरपाई के लिए सरकार ने भावांतर योजना चलाई हुई है। योजना के तहत 10 जनवरी तक के पैसे सीधे किसानों के खातों में आ चुके हैं। उसके बाद की बकाया रकम भी जल्द किसानों के खातों में आ जाएगी।