कुरुक्षेत्र। द्रोणाचार्य स्टेडियम में रविवार को नि:शुल्क शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में आयोजक विवेक शर्मा व श्रुति शर्मा ने प्रस्तुतिकरण व प्रर्दशन के माध्यम से परमयोग की दो तकनीकों परमनाद व परम श्वास के बारे में बताया। परमानंद, जिसे परम आनंद भी कहा जाता है, एक गहरी आध्यात्मिक स्थिति है जो परम सुख और शांति का अनुभव कराती है।
यह सांसों के माध्यम से भी प्राप्त किया जा सकता है, विशेष रूप से परम श्वास नामक अभ्यास द्वारा, जो सांसों पर ध्यान केंद्रित करके मन को शांत करने और आनंद की स्थिति में प्रवेश करने में मदद करता है। उन्होंने कहा यह विद्या परमहंस अद्वैतं आनंद उर्फ परमजी द्वारा सन 1950 में विकसित की गई थी। यह एक सरल, संपूर्ण व शक्तिशाली विद्या है, जो आज हमारे जीवन को वर्तमान से अधिक सुखी, संपन्न, निरोग, शांत और आनंदमय बनाती है।