कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के शालाक्य विभाग की ओर से सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसके चौथे दिन वीरवार को राजकीय आयुर्वेद कॉलेज त्रिपुनीथुरा (केरल) के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. श्री कुमार के और कुरुक्षेत्र के तनेजा डायग्नोस्टिक एंड रेडियोलॉजी सेंटर के संचालक डॉ. अर्पित तनेजा ने बतौर वक्ता विचार साझा किए।
प्रोफेसर डॉ. श्री कुमार ने कहा कि उच्च रक्तचाप (बीपी) और डायबिटीज से पीड़ित लोगों को समय-समय पर आंखों की जांच करानी चाहिए क्योंकि यह बीमारियां धीरे-धीरे आंखों की रोशनी पर असर डालती हैं। उन्होंने सिर दर्द और दृष्टिगत रोगों पर विस्तार से व्याख्यान दिया और बताया कि शुरुआती लक्षणों की अनदेखी मरीज के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। इस मौके पर कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान, कुलसचिव प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह तोमर, आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. आशीष कुमार मेहता, शालाक्य तंत्र विभाग की चेयरपर्सन प्रो. आशु, प्रो. मनोज कुमार तंवर सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
नेत्र रोग में बस्ति और पंचकर्म का महत्व
डॉ. श्री कुमार ने बताया कि नेत्र रोगों के उपचार में बस्ति की विशेष भूमिका है। माइग्रेन जैसी जटिल समस्या में पंचकर्म चिकित्सा बेहद लाभकारी है। उन्होंने कहा कि माइग्रेन सिर्फ सिर दर्द नहीं है बल्कि यह एक न्यूरोलॉजिकल विकार है। इसमें रोगियों को तेज सिर दर्द, उल्टी, रोशनी और आवाज के प्रति संवेदनशीलता जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। तनाव और अवसाद के कारण महिलाओं में माइग्रेन की समस्या अधिक पाई जा रही है। ऐसे रोगियों के लिए पंचकर्म की नस्य विधि प्रभावी साबित होती है और इससे लंबे समय तक राहत मिल सकती है। आधुनिक चिकित्सा में माइग्रेन को पूरी तरह खत्म करना कठिन है लेकिन आयुर्वेद में इसका सफल उपचार मौजूद है।
सीटी स्कैन से आसान हुआ निदान
डॉ. अर्पित तनेजा ने बताया कि नाक से जुड़ी समस्याएं जैसे नजला, एलर्जी, ट्यूमर, साइनोसाइटिस और कान से संबंधित जटिलताओं, जन्मजात विकृतियों व हड्डी के संक्रमण की पहचान में सीटी स्कैन बेहद कारगर है। उन्होंने कहा कि सीटी स्कैन न केवल रोग की सटीक पहचान करता है बल्कि जटिल मामलों में यदि सर्जरी की आवश्यकता हो तो उसकी योजना बनाने में भी अहम भूमिका निभाता है।