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Kurukshetra News: उपेक्षा का शिकार हो रहे फौजी कॉलोनी के लोग, नहीं मिल रहा मालिकाना हक

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कुरुक्षेत्र जानकारी देते हुए कुलवंत सिंह भट्टी व अन्य लोग। विज्ञ​प्ति
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कुरुक्षेत्र। वर्ष 1960 से सन्निहित सरोवर के समीप बसी फौजी कॉलोनी के अनेक लोग आज भी उपेक्षा के शिकार है। यहां लोगों को अन्य सुविधा मिलना तो दूर मालिकाना हक भी नहीं मिल रहा है, जिससे उनमें रोष बना हुआ है। अनेक लोगों के पास आज भी कच्चे मकान है, लेकिन सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पाया है।
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कॉलोनी के लोगों ने सरकार द्वारा जारी की गई आवासीय योजना के लिए वर्ष 2017 में फार्म भरे थे, जिसमें से लगभग 12 लोगों को आवासीय योजन का लाभ मिल भी चुका है। जबकि अब चार-पांच लोगों ने आवासीय योजना के लिए फार्म भरे है उन्हें आवास योजना का लाभ लेने के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। उनका कहना है कि कॉलोनी के लोग जब योजना का लाभ लेने के लिए नगर परिषद में जाते है वहां कहा जाता है कि इस कॉलोनी का पटवारी से लाल डोरा लिखवाकर लाओ। जब पटवारी के पास लाल डोरा के लिए जाते है तो पटवारी इंकार कर देता है। इससे ये लोग इस आवासीय योजना का लाभ लेने से वंचित है।
सुरेंद्र सिंह छिंदा, गुरचरण सिंह, कुलवंत सिंह भट्टी, नरेंद्र सिंह संधू, हरदीप सिंह आदि का कहना है कि यह कॉलोनी वर्ष 1960 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कैरो प्रताप सिंह ने फौजी कॉलोनी भूतपूर्व सैनिकों को अलॉट की थी। फौजी कॉलोनी में अधिकतर भूतपूर्व सैनिक व उनके बच्चे रह रहे है और अधिकतर अनुसूचित जाति से संबंधित मजहबी सिख जाति है जोकि गुरु तेग बहादुर जी का शीश दिल्ली से लेकर आनंदपुर साहिब पहुंचे भाई जैता जी (शहीद बाबा जीवन सिंह) के वंशज है। इस फौजी कॉलोनी में सीवरेज, पानी व बिजली की भी व्यवस्था है और प्राइमरी तक स्कूल भी है। कॉलोनी में गुरुद्वारा भी है जहां संगत शीश नवाती है। उन्होंने मांग की कि शहरों में भी जो लोग 60 वर्षों से रह रहे है उनको भी लाल डोरा खत्म करके मालिकाना हक दिया जाए।
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