चार सालों की लंबी कवायद के बाद आखिर पेंशन घोटाले में कार्रवाई हुई और नपा के एक क्लर्क व एक चपरासी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर दिया गया। एसएचओ दलीप सिंह ने बताया कि यह कार्रवाई जिला समाज कल्याण अधिकारी की शिकायत पर की गई है और नपा क्लर्क अश्वनी व सेवानिवृत्त चपरासी यशपाल के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।
उन्होंने कहा कि जांच के बाद आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। हालांकि जिला समाज कल्याण अधिकारी ने इस मामले में पहले उक्त दो कर्मचारियों अश्वनी कुमार व यशपाल के साथ ही पेंशन लेने वालों की पहचान सत्यापित करने वाले 11 पार्षदों के खिलाफ भी मामला दर्ज करने की सिफारिश की थी। लेकिन 27 जनवरी को इन आदेशों को पलटते हुए जिला समाज कल्याण अधिकारी ने पार्षदों को इस मामले से बाहर कर दिया और मात्र दो कर्मचारियों के खिलाफ गाज गिरा दी। पार्षदों के बारे में एसएचओ ने कहा कि इस संबंध में जिला समाज कल्याण अधिकारी को पत्र लिखकर पूछा जाएगा कि किस आधार पर पार्षदों के नाम भेजे गए थे और किस आधार पर काटे गए हैं।
आरोपी पार्षदों पर कार्रवाई नहीं की तो खटखटाएंगे अदालत का दरवाजा : बैंस
मामले में आरटीआई कार्यकर्ता एवं शिकायतकर्ता राकेश बैंस ने बताया कि मामले में जिन पार्षदों को क्लीन चिट दी गई है उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं और जब पार्षदों ने मृतक व अन्य लाभार्थियों की पहचान सत्यापित की है तो वह इस मामले में कैसे बच सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र ही इन पर मामला दर्ज नहीं किया तो माननीय अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
बता दें कि आरटीआई कार्यकर्ता राकेश बैंस ने 6 अप्रैल 2015 को एक शिकायत की थी, जिसमें मरे हुए लोगों को पेंशन वितरित करने का मुद्दा उठाया था। जांच के बाद इस मामलें में 10 मृतक व 71 अन्य लोगों को गलत तरीके से पेंशन देने की बात उजागर हुई थी। इसके बाद 9 लाख 72 हजार रुपये की वसूली ब्याज सहित कर ली गई थी।