पिहोवा नगरपालिका का एक फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां पालिका ने निर्माण कार्य हुए बगैर ही ठेकेदार को चार लाख 11 हजार 617 रुपये का भुगतान कर दिया, जबकि उक्त गली में आज तक निर्माण का एक पत्थर भी नहीं लगा। दूसरी ओर लाखों के भुगतान के बावजूद पालिका अधिकारी मामले से अंजान हैं।
वार्ड नंबर-9 की पूजा कालोनी में मेन गली निर्माण के लिए पालिका की ओर से करीब एक साल पहले टेंडर पास किया था। यह टेंडर पालिका से राधा माधव नाम की निजी फर्म ने करीब पांच लाख रुपये में प्राप्त किया था। पालिका से वर्क आर्डर मिलने के बाद फर्म ने गली का निर्माण कार्य काफी समय तक लटकाए रखा। इसके बाद फर्म ने गली के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री मौके पर भेज थी, लेकिन फर्म ने गली में एक इंच भी निर्माण कार्य नहीं किया। इसके बावजूद पालिका पिहोवा ने उसे 12 नवंबर 2020 को निर्माण के एवज में 411617 रुपये फर्स्ट रनिंग की पेमेंट का भुगतान कर दिया। टेंडर के मुताबिक फर्म को पूजा कॉलोनी में सतपाल से अशोक के घर तक गली का निर्माण करना था। करीब 400 फीट लंबी और 20 फीट चौड़ी (आठ हजार वर्ग फीट) इस गली में ब्लॉक लगाने का टेंडर पास हुआ था। सोमवार को अमर उजाला टीम ने उक्त गली का जायजा लिया। मौके पर गली में कहीं भी ब्लॉक नहीं लगाए गए और न ही कहीं कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ है। कॉलोनी के लोगों का कहना है कि गली के निर्माण के लिए एक टीम ने सर्वे किया था मगर निर्माण नहीं किया गया। वार्ड पार्षद से भी उन्होंने मामले को लेकर शिकायत की है।
मामले की कराएंगे जांच : सचिव
पालिका सचिव अंकुर पाराशर ने बताया कि उनको मामले की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि हाउस ने अपनी पावर का इस्तेमाल करके इसका डायवर्जन कराकर अन्य जगह निर्माण करा दिया होगा। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच कराई जाएगी।
आठ साल पहले हुआ था गली का निर्माण
करीब आठ साल पहले उक्त गली का निर्माण हुआ था। जरा सी बारिश में गली जलमग्न हो जाती है। कॉलोनी के लोगों की परेशानी को देखते हुए गली में ब्लॉक लगाने का टेंडर पास हुआ था। यह पूजा कॉलोनी का मेन रास्ता है। कॉलोनी में करीब 300 घर हैं।
पालिका अधिकारियों के निर्देश पर किया कार्य : तरुण
राधा माधव फर्म के प्रोपराइटर तरुण कुमार ने बताया कि यह करीब पांच लाख रुपये का टेंडर था, लेकिन लोगों के विवाद के कारण पालिका अधिकारियों के निर्देश पर टेंडर को वार्ड नंबर-16 में शिफ्ट किया गया था। जब उनसे सवाल किया गया कि वार्ड-16 का टेंडर अन्य जगह से शिफ्ट हुआ तो उन्होंने बताया कि उनको मौखिक तौर पर याद नहीं है। स्वीकार किया कि अगर कोई फर्जीवाड़ा पाया जाता है तो वह देनदार होंगे।