संवाद न्यूज़ एजेंसी
कुरुक्षेत्र। जिला नागरिक अस्पताल में प्रशासन चाह कर भी मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहिया नहीं करा पा रहा, जिसके पीछे अस्पताल में चिकित्सकों की कमी ही बड़ी वजह मानी जा रही है। अस्पताल में चिकित्सकों के स्वीकृत सभी 65 पद आज तक भरे नहीं जा सके हैं। यहां तक कि 25 से 30 पद रिक्त ही रहे हैं। वर्तमान में भी चार ओपीडी बंद पड़ी है तो 17 पद खाली माने जा रहे हैं।
अस्पताल में जितने डॉक्टर ज्वाइन करते हैं उनसे कहीं ज्यादा तबादला होकर चले जाते हैं या फिर नौकरी छोड़ देते हैं। ऐसे में चिकित्सकों की कमी का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। मरीजों को निजी अस्पतालों में जेब ढीली कर इलाज कराना पड़ रहा है।
दो साल से कई गंभीर रोगों से संबंधित ओपीडी डॉक्टर न होने के कारण बंद हैं। बता दें कि सेवानिवृत होने से पहले ही जिला अस्पताल से करीब दो दर्जन से ज्यादा चिकित्सक नौकरी छोड़ चुके हैं। अस्पताल में चर्म रोग ओपीडी, यूरोलॉजिस्ट ओपीडी के बाद मनोरोग की ओपीडी भी बंद है।
एलएनजेपी के लिए 65 चिकित्सकों की जरूरत है जिसके अनुसार ये पद स्वीकृत भी है, लेकिन महज 45 चिकित्सक ही रेगुलर पोस्ट पर हैं इनमें से भी छह मेडिकल ऑफिसर की पोस्ट पर हैं। 10 कंसलटेंट चिकित्सक हैं। स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स काफी कम हैं।
ये चिकित्सक छोड़ चुके नौकरी : जिला अस्पताल से डॉ. अनुराग कौशल ने 2011, गायनी सर्जन डॉ. नेहा 2015, डॉ. विवेक ने 2016 में, मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र परुथी, डॉ. नेहा दुआ सोबती, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रजनी गुप्ता, दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. पूजा ललित, यूरोलॉजिस्ट डॉ. राजेश, मनोरोग विशेषज्ञ डॉक्टर सुरेंद्र मढ़ान के अलावा कई अन्य चिकित्सक नौकरी छोड़ चुके हैं।
अस्पताल में चिकित्सकों की कमी : डॉ. अग्रवाल : चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सारा अग्रवाल का कहना है कि अस्पताल में चिकित्सकों के 65 पद स्वीकृत है। मनोरोग विशेषज्ञ डॉक्टर सुरेंद्र मढ़ान भी इसी माह नौकरी छोड़ चुके हैं। कुछ चिकित्सक मिले भी हैं लेकिन आज भी सभी पदों पर तैनाती नहीं है। सरकार को चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए लिखा जाएगा ।