संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी (कुवि) में कार्यरत पार्ट-टाइम शिक्षकों को एक बार फिर सत्र समाप्ति के बाद घर बैठने का डर सताने लगा है। विश्वविद्यालय में इस समय 120 से अधिक पार्ट-टाइम शिक्षक विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं, जो पूरी निष्ठा और समय पर अपना कार्य करते हैं। बावजूद इसके, सत्र समाप्त होते ही उन्हें अगले सत्र तक बिना वेतन के घर बैठना पड़ता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ता है।
शिक्षकों का कहना है कि वे कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदेश सरकार को इस समस्या से अवगत करा चुके हैं। यहां तक कि पार्ट-टाइम शिक्षक एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा सहित कैबिनेट को ज्ञापन सौंप चुकी है लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। उनकी ओर से बार-बार आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन उन पर अमल नहीं हो पाया। इससे शिक्षकों को भविष्य की चिंता सताने लगी है।
शिक्षकों का कहना है कि उन पर वर्कलोड की मार भी पड़ रही है। यूनिवर्सिटी ने कॉन्ट्रेक्ट टीचर्स को 20 घंटे का वर्कलोड दिया हुआ है जोकि नियम के मुताबिक 16 घंटे का होना चाहिए और बचा हुआ वर्कलोड पार्ट टाइम टीचर्स को मिलना चाहिए।
इसी के साथ विद्यार्थियों के असाइनमेंट, पेपर चेकिंग, अवार्ड अपलोडिंग, मिड टर्म पेपर ड्यूटी आदि का कार्य भी साथ-साथ करना पड़ता है, जिसका कोई अतिरिक्त मेहनताना भी नहीं दिया जाता। कार्य एक रेगुलर टीचर की तरह लिया जाता है, लेकिन मेहनताना लेक्चर बेसिस दिया जाता। एक माह में 70 से 80 के करीब लेक्चर एक पार्ट टाइम टीचर देता है और वेतन 45 लेक्चर्स का ही मिलता है। कार्य का सही मूल्यांकन कर स्थायी समाधान निकाला जाए।