कुरुक्षेत्र। जिले में कुल 239 स्वीकृत पदों में से स्टाफ नर्स और नर्सिंग ऑफिसर के 45 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं जिससे अस्पताल की व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। स्टाफ की कमी का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है।
प्रदेशभर की स्थिति भी चिंताजनक है। नर्सिंग ऑफिसर के 641, नर्सिंग अधिकारी के 488 और सीनियर नर्सिंग अधिकारी के 97 पद रिक्त हैं। इसके साथ ही 18 से 20 वर्ष का अनुभव होने के बावजूद स्टाफ नर्सों को पदोन्नति नहीं मिल पा रही।
हर माह एक से दो नर्सों के सेवानिवृत्त होने से हालात और बिगड़ रहे हैं। पदोन्नति न होने से कर्मचारियों में रोष बढ़ रहा है। पॉलिसी के अनुसार मैट्रन पद के लिए नर्सिंग सिस्टर के पद पर सात वर्ष और सहायक मैट्रन के लिए पांच वर्ष का अनुभव अनिवार्य है।
इसके बावजूद 10 से 12 वर्ष का अनुभव रखने वाली नर्सिंग सिस्टरों को भी पदोन्नति का लाभ नहीं मिल पा रहा है। रिजर्वेशन पॉलिसी के तहत मैट्रन के 33 पदों और सहायक मैट्रन के 23 पदों में से 20 प्रतिशत पद अनुसूचित जाति की नर्सिंग सिस्टरों के लिए आरक्षित हैं। नियमों के अनुसार सात नर्सिंग सिस्टरों को मैट्रन और पांच को सहायक मैट्रन पद पर पदोन्नति मिलनी चाहिए लेकिन यह प्रक्रिया भी लंबित पड़ी है। नर्सिंग सिस्टरों ने सरकार से शीघ्र न्याय की मांग की है।