कुरुक्षेत्र। अयोध्या में विराजमान श्री रामलला की मूर्ति बनाने के लिए प्रख्यात शिल्पकार अरुण योगीराज ने यूके व यूएसए से मिले ऑर्डर भी रोक दिए थे। करीब तीन माह में श्री रामलला की मूर्ति तैयार हो गई थी, जिसके बाद पहले के मिले ऑर्डर पर काम किया जाने लगा। श्रीराम लला की मूर्ति के बाद अब यह पहला मौका होगा जब धर्मनगरी के 18 मंजिला ज्ञान मंदिर में विराजमान होने वाले भगवान श्रीकृष्ण के विराट स्वरूप को आकार देंगे। यह स्वरूप भी उसी कृष्ण शिला से तैयार किया जाएगा, जिससे श्रीराम लला की मूर्ति बनाई गई थी।
यह कहना है प्रख्यात शिल्पकार अरुण योगीराज का, जो मंगलवार को धर्मनगरी पहुंचे थे। 18 मंजिला ज्ञान मंदिर ट्रस्ट की ओर से उन्हें यहां विराजमान किए जाने वाले श्रीकृष्ण के विराट स्वरूप को तैयार किए जाने का ऑर्डर दिया गया। इसी के चलते उन्होंने यहां मंदिर के तैयार किए जा रहे गृभ गृह का जायजा लिया।
उन्होंने बातचीत में बताया कि वे हर मूर्ति को पूरी आस्था के साथ तैयार करते हैं लेकिन जब उन्होंने श्रीराम लला की मूर्ति बनाई तो उनकी आस्था कई गुना और बढ़ गई थी। अब ऐसा ही आभास उन्हें श्रीकृष्ण के विराट स्वरूप के प्रति होने लगा है। जहां श्रीराम लला की मूर्ति करीब तीन माह में तैयार हो गई थी वहीं श्रीकृष्ण के विराट स्वरूप को तैयार करने में करीब एक साल लगेगा।
मौसम का नहीं पड़ता श्रीकृष्ण शिला पर असर
अरूण योगीराज बताते हैं कि श्रीकृष्ण शिला पर गर्मी, सर्दी, बारिश, धूप व पानी सहित किसी भी मौसम का कोई असर नहीं पड़ता। उसकी चमक वैसी ही रहती है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी इस शिला के ऊपर से गुजरे किसी भी पेय पदार्थ को पीने से कोई नुकसान नहीं होता। यह शिला कर्नाटक में मिलती है।
अब इन मूर्तियों पर कर रहे काम
अरुण योगीराज ने बताया कि वे वर्तमान में यूएसए के लिए साईं बाबा, यूके के लिए श्री बाला जी की मूर्ति के अलावा कर्नाटक विधानसभा के लिए 25 फीट ऊंची राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा तैयार कर रहे हैं। श्रीराम लला की मूर्ति के बाद यह पहला मौका है जब उन्होंने श्रीकृष्ण के विराट स्वरूप को बनाए जाने के लिए नए कार्य का ऑर्डर लिया है।
पांच पीढि़यों से कर रहे काम
अरुण योगीराज का कहना है कि वे अपने परिवार की पांचवीं पीढ़ी है, जो मूर्तिकला में लगी है। इस कला ने उनके परिवार को हर पीढ़ी में नई पहचान दी है। वे 11 साल के थे जब अपने पिता के साथ मूर्ति कला में शरीक होने लगे थे। मैसूर विश्वविद्यालय में एमबीए करने के बाद भी उन्होंने इसी कला में आगे बढ़ने का फैसला किया था। इस कला में युवा अपना कॅरिअर भी बना सकते हैं।
तीन एकड़ में किया जा रहा मंदिर का निर्माण
श्री ब्रह्मपुरी अन्नक्षेत्र ट्रस्ट ज्ञान मंदिर के संस्थापक स्वामी चिरंजीवपुरी महाराज व ट्रस्ट के प्रधान राजेश गोयल, ट्रस्टी डॉ. सुशील गुप्ता सहित अन्य ट्रस्टियों से भी योगीराज ने मंदिर की महत्ता को जाना और भगवान श्रीकृष्ण के विराट स्वरूप की गहनता से जानकारी भी ली। तीन एकड़ भूमि में 18 मंजिला ज्ञान मंदिर का ढांचा पूरी तरह से बनकर तैयार है तो अब पत्थर लगाए जाने का कार्य भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा। गीता के 18 अध्यायों के अनुसार ही यह 18 मंजिला मंदिर बनाया जा रहा है।