कुरुक्षेत्र। जिला नागरिक अस्पताल के आपातकालीन विभाग में इन दिनों सीमित संसाधनों के कारण मरीजों को उपचार के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इमरजेंसी वार्ड में एक समय में केवल एक एमबीबीएस चिकित्सक की ड्यूटी होने से मरीजों की संख्या बढ़ने पर व्यवस्थाएं प्रभावित हो जाती हैं।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की अनुपस्थिति के कारण हर माह 100 से 150 गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद पीजीआई चंडीगढ़ व कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े अस्पतालों में रेफर करना पड़ रहा है। अस्पताल में एक माह में 2163 मरीज भर्ती हुए जिनमें से 708 मरीज आपातकालीन विभाग में पहुंचे और 173 मरीजों को रेफर करना पड़ा। 20 फरवरी को सिविल सर्जन के पास शिकायत भी पहुंची थी कि मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। इसकी जांच अस्पताल प्रशासन की ओर से की जा रही है। बदलते मौसम के कारण दमा व अन्य सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है।
इमरजेंसी गेट पर होना चाहिए हेल्पर : प्रकाश चंद
कुरुक्षेत्र निवासी 76 वर्षीय प्रकाश चंद ने बताया कि वे दवा लेने के लिए अस्पताल पहुंचे थे लेकिन इमरजेंसी गेट पर कोई हेल्पर मौजूद नहीं था। उन्हें करीब 10 मिनट तक सहायता के लिए इंतजार करना पड़ा। बुजुर्ग होने व एक टांग न होने के कारण उन्हें अंदर जाने में कठिनाई हुई। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी गेट पर हेल्पर की तैनाती जरूरी है, ताकि मरीजों और बुजुर्गों को समय पर मदद मिल सके।
वार्ड में नहीं देखते चिकित्सक
मरीज के साथ आई शिवानी ने बताया कि उनकी सास को सांस लेने में दिक्कत और छाती में दर्द होने पर वे उन्हें इमरजेंसी वार्ड में लेकर पहुंचे। चिकित्सक ने मरीज को देखने से मना कर दिया और ओपीडी की पर्ची बनवाकर दिखाने को कहा। उन्हें दो घंटे तक अस्पताल में भटकना पड़ा, जिससे परिजनों को काफी परेशानी हुई।
फोन कर बुलाए जाते डाॅक्टर
पीएमओ डॉ. साहरा अग्रवाल ने बताया कि ओपीडी समय में मरीज संबंधित चिकित्सक को दिखाए जाते हैं जबकि रात के समय जरूरत पड़ने पर डॉक्टर को फोन कर बुलाया जाता है। मरीजों को अस्पताल में बेहतर इलाज मिल रहा है। किसी को भी परेशानी न हो इसके लिए व्यवस्था की जा रही है।
कुरुक्षेत्र। इमरजेंसी वार्ड से रेफर मरीज को लेकर जाते एंबुलेंस चालक। संवाद